पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की. इस दौरान बिहार में उद्योगों की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक आधारभूत संरचना, निर्यात संवर्धन और डेटा सेंटर के विकास से जुड़े छह महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुयी. मुलाकात के क्रम में बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और निर्यात की संभावनाओं के विस्तार पर भी बातचीत हुयी. बैठक में निवेशकों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से सुनिश्चित करने के लिए एस्क्रो अकाउंट की व्यवस्था विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया.
इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रक्रिया को अधिक सुगम और भरोसेमंद बनाना है. इसके साथ ही पटना में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विभिन्न कार्यालयों और संबद्ध संस्थाओं को एक ही परिसर में लाने के लिए एकीकृत वाणिज्य भवन स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इस पहल से उद्योगपतियों, निर्यातकों और निवेशकों को विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी.
गयाजी में विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना की अतिरिक्त लागत में केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया गया. इसके लिए केंद्रीय वाणिज्य सचिव के उद्योग विभाग के सचिव तथा नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक के बीच संयुक्त बैठक कर अतिरिक्त लागत और उसमें केंद्र सरकार के संभावित सहयोग का आंकलन करेंगे. बैठक में बिहार के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्यात संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया गया. निर्यात के इच्छुक उद्यमियों और कारोबारियों की सूची तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने तथा उन्हें निर्यात संवर्धन परिषदों की गतिविधियों से जोड़ने पर चर्चा हुई. इससे बिहार के उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात संबंधी अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिल सकेगी. इसके अतिरिक्त, भारतीय चाय बोर्ड में बिहार से एक सदस्य को प्रतिनिधित्व देने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया.
बैठक के दौरान डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीकी आधारभूत संरचना के विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई. बिहार में समर्पित डेटा सेंटर नीति तैयार करने की संभावनाओं पर विचार किया गया. साथ ही राज्य में 100 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में प्रयास तेज करने पर जोर दिया गया. इस पहल से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने के साथ सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं.