Bihar

न्यूबॉर्न केयर यूनिट वॉर्ड में लाइट नहीं, अस्पताल के बाहर इलाज करने को मजबूर डॉक्टर, वीडियो हो रहा वायरल

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

बक्सर (BUXER): बिहार के अलग-अलग जिलों से आए दिन हमें स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती है, जिन्हें देखकर उसकी बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है.कभी अस्पताल से डॉक्टर गायब मिलते है, तो कभी आम लोगों के लिए आई दवाएं बाहर बिकती नजर आती है, तो कभी टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन किए जाने की खबर सामने आती है. एक बार फिर बिहार के बक्सर जिले से ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. इस तस्वीर ने उन बड़े-बड़े दावों की भी हकीकत उजागर कर दी है, जो नेता जनता से करते हैं.

गेट के पास डॉक्टर मरीज का इलाज करते नजर

दरअसल, बक्सर जिले से सामने आई तस्वीर में अस्पताल के अंदर नहीं, बल्कि उसके गेट के पास डॉक्टर मरीज का इलाज करते नजर आ रहे है. आखिर ऐसी क्या स्थिति बन गई कि पूरी डॉक्टरों की टीम को अस्पताल के गेट पर ही इलाज करना पड़ा, चलिए आपको इसके पीछे पूरी सच्चाई बताते हैं. असल में बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) में भर्ती दो नवजात बच्चों का इलाज डॉक्टर यूनिट के गेट के बाहर करते दिख रहे है.

अस्पताल प्रबंधन पर फूटा लोगों का गुस्सा

वीडियो में परिजन और महिलाएं हाथ से पंखा झलकर नवजातों को हवा करती नजर आ रही है. लोग अस्पताल प्रबंधन की बदइंतजामी पर खुलकर नाराजगी जता रहे हैं. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में बिजली गुल थी और जेनरेटर भी नहीं चल रहा था. गर्मी और उमस के कारण MNCU के अंदर बच्चों को रखना खतरे से खाली नहीं था, इसलिए डॉक्टरों ने मजबूरी में बाहर इलाज शुरू किया. वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा.यूजर्स पूछ रहे हैं कि जब MNCU जैसी संवेदनशील यूनिट में ही बिजली का बैकअप नहीं है तो आम मरीजों का क्या हाल होगा.

बिजली गुल होने और जेनरेटर खराब होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं

फिलहाल प्रशासन की ओर से बिजली गुल होने और जेनरेटर खराब होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. मामला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच की बात कही है.वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन वीडियो में जो कुछ दिख रहा है वह काफी ज्यादा भयावह है अगर इस तरह से अस्पताल का हाल रहा तो फिर मरीज़ का क्या होगा.