Bihar

बांकीपुर सीट: 2020 में बिहारी बाबू के बेटे को किसने हराया? क्या RJD से दूरी बनाकर नया गठबंधन तलाश रही है कांग्रेस?

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
बांकीपुर सीट: 2020 में बिहारी बाबू के बेटे को किसने हराया? क्या RJD से दूरी बनाकर नया गठबंधन तलाश रही है कांग्रेस?

टीएनपी डेस्क:  बिहार का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव सिर्फ एक उपचुनाव नहीं है, बल्कि यह कई तरह से महत्वपूर्ण हो गया है. कांग्रेस क्या  कोई नई  रणनीति पर काम कर रही है? क्यों कांग्रेस प्रशांत किशोर को समर्थन देने पर विचार कर रही है? क्या राजद के बिना बिहार में कोई गठबंधन बनने जा रहा है?इधर , तृणमूल  सांसद और बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रशांत किशोर का समर्थन कर दिया है और लोगों से प्रशांत किशोर के पक्ष में मतदान करने की अपील की हैं.   इस संबंध ट्वीट में उन्होंने किया है. 

 यहां आपको बता दें कि बांकीपुर  विधानसभा सीट से बिहारी बाबू के बेटे 2020 में कांग्रेस के  टिकट पर चुनाव मैदान में थे.  हालांकि लव सिन्हा  को हार मिली थी और नितिन नवीन ने जीत दर्ज की थी.  दूसरी ओर राजद ने बांकीपुर सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है.  इससे यह बात तो साफ हो गई है कि अब महागठबंधन प्रशांत किशोर को समर्थन नहीं करेगा।  बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव अब एक दिलचस्प जंग में बदल गया है.  रेखा गुप्ता को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उतारकर राजद ने इस  समझ को तोड़ दिया है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एक ही उम्मीदवार खड़ा करेग।  

सवाल उठने लगे हैं कि  है कि आखिर राजद , भाजपा के गढ़ को तोड़ने के लिए एक विपक्ष की राजनीति से क्यों परहेज किया? दरअसल, राजद  मूल विपक्ष का चेहरा बना रहना चाहता है .  राजद  सोचता है कि बिहार की जनता जब भी सत्ता बदलने  की बात सोच, तो उसके सामने विकल्प के रूप में  राजद हो या फिर राजद  से जुड़ा गठबंधन हो.  राजद  कभी नहीं चाहेगा कि प्रशांत किशोर की  पार्टी विपक्ष के रूप में उभर कर जनता के सामने आये.  वैसे कांग्रेस अभी बांकीपुर  सीट  को लेकर द्वंद्व की स्थिति में है.  कांग्रेस ने लगभग मन बना लिया है कि वह प्रशांत किशोर को समर्थन कर सकती है. .

  हालांकि इसकी अधिकृत घोषणा का इंतजार करना होगा।  कांग्रेस यह  भी चाहती है कि बिहार में उसे राजद  की बी  टीम कहलाने  से मुक्ति मिले।  ऐसे में कांग्रेस जन सुराज  को अपना समर्थन देकर बिहार में एक नए गठबंधन की जमीन  तैयार करना  चाहती है.  वह टेस्ट करना चाहती है कि बगैर बीजेपी, बगैर राजद के   क्या कोई गठबंधन बन सकता है? वैसे बंगाल का चुनाव उदाहरण है कि कांग्रेस सब कुछ जानते हुए भी बंगाल में अकेले चुनाव लड़ी थी.  यह बात तो तय है कि राजद  अब अपना उम्मीदवार दे चुका ही.  ऐसे में अब अगर कोई परिवर्तन नहीं भी होता है तो बांकीपुर  में त्रिकोणीय संघर्ष हो सकता है.  यह अलग बात है कि भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है.