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भागलपुर में फर्जी शिक्षिका के वेतन में 98 लाख गबन मामले में एक और क्लर्क निलंबित, तत्कालीन डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई तेज

Manjesh Kumar Patna
Manjesh Kumar Patna
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

भागलपुर: भागलपुर में जिला शिक्षा विभाग में करीब 98 लाख रुपए के गबन मामले में कार्रवाई तेज हो गई है. विभागीय जांच के बाद एक और क्लर्क को निलंबित किया गया है जबकि तत्कालीन डीपीओ के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई को लेकर तैयारी की जा रही है. जानकारी के अनुसार फर्जी शिक्षिका का आईडी बनाने के लिए निम्न वर्गीय लिपिक जफर अली के आईडी का इस्तेमाल किया गया था. जांच में यह जानकारी मिलने के बाद अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है. हालांकि अभी यह जांच जारी है कि फर्जी आईडी बनाने में उनकी संलिप्तता कितनी थी.

वहीं, तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रपत्र क गठित किया गया है. निदेशक प्रशासन के निर्देश पर क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) सुभाष कुमार गुप्ता ने यह कार्रवाई की है. विभागीय जांच के अनुसार, विभागीय ऑपरेटर अविनाश राज ने 29 मार्च को बैक डेट में वर्ष 2025 की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार की थी. आरोप है कि इस प्रक्रिया में स्थापना शाखा के लिपिक जफर अली की मेकर आईडी का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद तैयार की गयी आईडी के माध्यम से वेतन मद में सरकारी राशि का भुगतान किया गया. इस मामले में 98.12 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन का मामला सामने आया है.

विभागीय सूत्रों के अनुसार मेकर आईडी का इस्तेमाल काफी महत्वपूर्ण होता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जफर अली की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी से जुड़े आरोप कितना सही है. लिपिक को निलंबित करने की कार्रवाई इसी मामले में विभागीय जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गयी है. अब जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि फर्जी आईडी बनाने, उसे सत्यापित करने और उसके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी.

98.12 लाख रुपये के गबन मामले में विभागीय कार्रवाई इससे पहले भी हो चुकी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी को मुख्यालय पहले ही निलंबित कर चुका है. अब तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रपत्र क गठित किया गया है. इससे मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है.

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