बेगूसराय (BEGUSARAI):बिहार का लौंडा डांस अक्सर चर्चा में रहता है, लेकिन बेगूसराय से सामने आई एक घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है. मामला बलिया थाना क्षेत्र के दियारा इलाके स्थित शिवनगर गांव का है, जहां एक महिला के श्राद्धकर्म और श्रद्धांजलि सभा में भजन-कीर्तन की जगह पूरी रात लौंडा डांस करवाया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे है.
भजन कीर्तन प्रवचन की जगह लौंडा डांस
मिली जानकारी के अनुसार, शिवनगर गांव निवासी मैना देवी उर्फ जानकी का निधन 19 मई को हो गया था.उनके निधन के बाद 30 मई को दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.मृतका के पुत्र महाराणा प्रताप पासवान ने पारंपरिक भजन-मंडली, साधु-संत या धार्मिक प्रवचन की व्यवस्था करने के बजाय लौंडा डांसरों को बुलाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराया.
फूहड़ गीतों पर जमकर लगे ठुमके
कार्यक्रम स्थल पर मृतका की तस्वीर के साथ भावपूर्ण श्रद्धांजलि का बड़ा बैनर लगाया गया था. इसी बैनर के सामने तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजता रहा और डांसर रातभर भोजपुरी व हिंदी गीतों पर प्रस्तुति देते रहे. शुरुआत में कार्यक्रम सामान्य रहा, लेकिन रात गहराने के साथ माहौल किसी शादी समारोह या ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम जैसा दिखाई देने लगा.प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम में शामिल डांसरों ने कई लोकप्रिय भोजपुरी और हिंदी गीतों पर नृत्य किया.इस दौरान मौजूद कुछ ग्रामीण और मेहमान भी नाच-गाने में शामिल हो गए.शोकसभा के बजाय माहौल मनोरंजन और उत्सव जैसा नजर आया, जिसने कई लोगों को असहज कर दिया.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है वीडियो
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.कई लोगों ने इसे "कलयुग की पराकाष्ठा" बताया है. सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि श्राद्ध और श्रद्धांजलि जैसे गंभीर अवसरों पर इस तरह का आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है.गांव के कई लोगों का मानना है कि श्राद्धकर्म दिवंगत आत्मा की शांति और स्मरण के लिए किया जाता है. ऐसे अवसरों पर सामान्यतः भजन-कीर्तन, गरुड़ पुराण का पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या प्रार्थना सभाओं का आयोजन होता है.उनका कहना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के लगातार हो रहे क्षरण की झलक मिलती है.
कलयुग की पराकष्ठा
हिंदू सनातन परंपरा में मृत्यु के बाद आयोजित होने वाले श्राद्धकर्म और श्रद्धांजलि सभा को गंभीर, शांत और श्रद्धापूर्ण माहौल का प्रतीक माना जाता है.हालांकि बदलते समय के साथ कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ रही है, जो सामाजिक मर्यादाओं और पारंपरिक संस्कारों पर बहस को जन्म दे रही है. बेगूसराय की यह घटना भी अब इसी बहस का हिस्सा बन गई है.