TNP DESK- झारखंड हो, बिहार हो अथवा धनबाद हो. सब जगह यही चर्चा है कि बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में क्या होगा? क्या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा बचेगी अथवा बाजी कोई और मारेगा? दरअसल बांकीपुर उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है, यह सम्राट चौधरी सरकार के लिए भी चुनौती है, तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तो यह सीट ही रही है. इस सीट पर कई समीकरण बन और बिगड़ते दिख रहे हैं. राजनीतिक रण पूरी तरह से सज चुका है. सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी -अपनी चालें चल दिए हैं. । इस चुनावी महासंग्राम में चार चेहरे हैं ,जो एक दूसरे से लड़ाई को तैयार हैं.
भाजपा ने अभिषेक कुमार बंटी पर भरोसा जताया है
भाजपा ने अभिषेक कुमार बंटी पर भरोसा जताया है, जबकि राजद ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है. हालांकि कांग्रेस की स्थिति अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है. तेज प्रताप यादव की पार्टी ने बीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है. जनसुराज के संस्थापक प्रशांत कुमार जिंदगी का पहला चुनाव लड़ रहे हैं. बांकीपुर सीट बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने वाली सीट मानी जा रही है और यही वजह है कि सबकी नजर इस सीट पर टिक गई है. भाजपा ने अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाया है,जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं. पटना के बोरिंग रोड में रहते हैं और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नजदीकी माने जाते हैं. करीब 26 साल से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं.
राजद ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है
राजद ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है. वैश्य समाज से आने वाली रेखा गुप्ता शहरी मतदाताओं के भरोसे जीत का दावा कर रही हैं. 2025 के विधानसभा चुनाव में वह 51000 मतों से हार गई थी. उस समय भी राजद की उम्मीदवार थी. चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी जीवन में पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी, लेकिन बांकीपुर से प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी ने इस उप चुनाव को महत्वपूर्ण बना दिया है. जनशक्ति जनता दल ने सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है. महिला विकास मंच की राष्ट्रीय संरक्षक रही बीणा मानवी लंबे समय से महिला सशक्तिकरण और उत्पीड़न के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं.
2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी यह सीट
बता दें कि बांकीपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इसके पहले यह पटना वेस्ट विधानसभा के नाम से जानी जाती थी. पटना वेस्ट सीट पर पिछले 14 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तीन बार जीत दर्ज की है. वाम दलों को दो बार सफलता मिली है ,जबकि जन क्रांति और जनता दल एक-एक बार जीत हासिल की है. दो बार निर्दलीय उम्मीदवार विजई रहे और भाजपा ने पांच बार यह सीट जीती। साल 1995 के बाद से यह सीट लगातार भाजपा के पास है. पहले नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिंह 1995, 2000 और 2005 में चुनाव जीते थे.
कांग्रेस का स्टैंड अभी तक साफ़ नहीं
2006 में उनके निधन के बाद उनके पुत्र नितिन नवीन लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. उनके राज्यसभा में जाने के बाद यह सीट खाली हुई है. बांकीपुर शहरी सीट होने के बावजूद यहां जातीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अब देखना है कि 2026 के उपचुनाव में किसको जीत मिलती है. कांग्रेस का स्टैंड अभी तक बहुत क्लियर नहीं है. इस वजह से यह माना जा रहा है कि कांग्रेस महागठबंधन से छिटक कर किसी नए गठबंधन की ओर झुक सकती है. वैसे भी बिहार में कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह के बयान के बाद आरोप -प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में अभी तक यह बात स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस राजद की उम्मीदवार को समर्थन करेगी या अपना कोई उम्मीदवार देगी। अथवा किसी नए समीकरण की ओर बढ़ेगी।
