टीएनपी डेस्क (TNPDESK): बंगाल की "राजनीति" पर अभी पूरे देश की नजर है. क्या तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद भी ममता बनर्जी से अलग हो सकते हैं? विधायक तो अलग हो ही गए हैं तो सवाल उठता है कि क्या अभिषेक बनर्जी से मनमुटाव की वजह से ममता के भरोसे राजनीति करने वाले सांसद और विधायक भी दीदी का साथ छोड़ रहे हैं, या इसके पीछे कोई और बात है? क्या डर और जनता में कथित आक्रोश की वजह से विधायक और सांसद ममता से दूरी बनाना शुरू कर दिए हैं? कहा तो यह भी जा रहा है कि जो विधायक ममता बनर्जी से अलग हुए हैं, उनमें भी फूट पड़ गई है.
तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक भी पूरी तरह अलग होना नहीं चाहते
वह पूरी तरह से ममता बनर्जी से अलग होना नहीं चाह रहे हैं लेकिन खुले रूप से साथ आना भी नहीं चाहते हैं. परिस्थितिया अब धीरे-धीरे ममता बनर्जी के हाथ से निकलती जा रही है. दूसरी ओर ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता की पहल शुरू की है. 8 जून को दिल्ली में बड़ी बैठक हो सकती है. विपक्षी दल इसमें साथ आ सकते है. वैसे जानकारी के अनुसार ममता बनर्जी संगठन को फिर से ताकत देने में जुट गई हैं. राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में कई बदलाव किए गए हैं. सांसद कल्याण बनर्जी के अनुसार वरिष्ठ नेता डेरेक ओबेरॉयन और ओला सेन को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. दोनों नेता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर काम करेंगे और संगठन की जिम्मेवारियों के काम में पूरा सहयोग करेंगे. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी फिलहाल अस्वस्थ हैं. उनकी जगह पर चंद्रिमा भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी दी गई है.
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल मचा हुआ है
कई उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी की गई है. इस बैठक में कई सांसद भी मौजूद थे. कहा जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस की यह बैठक पार्टी के लिहाज से बड़ी बैठक थी. क्योंकि पार्टी में फिलहाल उथल-पुथल मची हुई है. पार्टी से निष्कासित दो विधायकों ने विधानसभा में 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. हालांकि इस दावे को खारिज भी किया जा रहा है. बंगाल में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या तृणमूल कांग्रेस को बचा पाएंगी ममता बनर्जी. कहा तो यह भी जा रहा है कि ममता बनर्जी ने कई बागी विधायकों से निजी तौर पर संपर्क किया है और उन्हें फिर से पार्टी में साथ आने का आग्रह किया है. अब देखना है कि ममता के अनुरोध पर नाराज विधायक क्या कदम उठाते हैं? वैसे सुभेंदु अधिकारी सरकार लगातार एक्शन में है. इस वजह से भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक भी ममता बनर्जी से दूरी बना रहे हैं. चुनाव परिणाम आने के एक महीने के बाद ही तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से बिखर गई है.
