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क्या असम चुनाव के बाद झारखण्ड में बदल सकता है सत्ता का समीकरण, जयराम-सरयू के बयान के क्या है मायने ?

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 4, 2026, 3:03:29 PM

रांची(RANCHI): क्या असम  चुनाव के बाद राज्य में कुछ बड़ा होने वाला है.हाल के दिनों में सियासी फिजा बदली बदली दिख रही है. राज्य में सत्ता गठबंधन की सरकार है और हाल में दोनों दल आमने सामने है. दोनों ओर से तीखी बयान बाजी शुरू हो गई. एक तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस को विषैला सांप बता दिया तो इस चर्चा और बयानबाजी को और बल मिल गया. इसी बीच डुमरी विधायक जयराम महतो ने खुलासा किया तो दूसरी तरफ अब झारखंड की राजनीति में चाणक्य कहे जाने वाले सरयू राय ने भी बड़ा बयान दिया है.इस रिपोर्ट में सरकार बदले की पूरी खबर की बात करेंगे. कैसे समीकरण बदल सकता है.     

जयराम के बयान से शुरू हुई सरगर्मी     

सबसे पहले सियासी हवा बदले की चर्चा मार्च 14 को शुरू हुई. डुमरी विधायक जयराम महतो ने मीडिया में एक बयान दिया. जिसमें दावा किया कि झारखंड में आने वाले दिनों में सरकार बदली बदली दिखेगी. जहां कांग्रेस नहीं होगी. हेमंत सोरेन अकेले सरकार चलाएंगे. ऐसे में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि नए सरकार में वह भी शामिल हो सकते है. कुछ दिनों तक इसपर चर्चा शुरू हुई.

आमने सामने आई कांग्रेस- झामुमो

लेकिन इसके बाद अचानक से झारखंड की सत्ता में काबिज झामुमो-कांग्रेस में बयान बाजी शुरू हो गई. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस को विषैला सांप बता दिया. जिससे सत्ता समीकरण बदले की चर्चा को और बल मिल गया. इसके बाद कांग्रेस ने राज्य में अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और आंदोलन की बात कही. यानि अपनी ही सरकार में आंदोलन करने की बात कांग्रेस ने जब किया तो इसका इशारा साफ था की सब कुछ ठीक नहीं है.

सरयू का ऑफर हेमंत को बिना शर्त देंगे समर्थन

इस बयानबाजी के बीच झारखंड की राजनीति में चाणक्य की भूमिका में रहने वाले सरयू राय ने इस हवा को और बल दे दिया. धनबाद में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में जिस तरह से दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, उससे गठबंधन की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है.  उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के कुछ बयानों में झारखंड के अफसरों को माफिया बताया गया, जो सीधे तौर पर हेमंत सोरेन पर हमला है. ऐसे में यदि मुख्यमंत्री अपने नेतृत्व को मजबूत मानते हैं, तो उन्हें बिना कांग्रेस और भाजपा के नई सरकार बनाने पर विचार करना चाहिए. और इस सरकार को उनका भी समर्थन मिलेगा.             

फिलहाल क्या है जादुई आकड़े

सबसे पहले अगर आकडे को देखे तो इसमें झामुमो-कांग्रेस-राजद-माले के समर्थन से सरकार चल रही है. जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34,कांग्रेस 16,राजद 4  माले के 2 विधायक का समर्थन हेमंत सरकार को मिला है. ऐसे में अगर कांग्रेस को हटा भी दिया जाए तो बहुमत के आकड़े के लिए एक विधायक की जरूरत पड़ेगी. यानि ज्यादा मेहनत भी नहीं है. खुद से कई विधायक सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है.

नए समीकरण में क्या हो सकता है

अगर नए समीकरण को देखे तो इसमें ज्यादा कुछ बदला हुआ नहीं दिखेगा. झामुमो 34,राजद 4,माले 2,जदयू 1 मिला दे तो बहुमत का आकड़ा आसानी से पूरा होता दिख रहा है.इसके साथ JLKM ने भी सरकार को समर्थन की बात कही है.हलाकी जब नए सरकार का समीकरण बनेगा तो कई विधायकों के टूटने के भी आसार है. वह झामुमो में शामिल हो सकते है. 

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