धनबाद (DHANBAD) : बिहार विधानसभा चुनाव में जबरदस्त मुंह की खाने के बाद प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में है. उनके नाम की चर्चा फिर लौट आई है. कई तरह के कयास लगाए जा रहे है. प्रशांत किशोर ने अभी हाल ही में सांसद और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी. इसके बाद से मुलाकात के मायने निकाले जा रहे है. वैसे भी 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने "वोट चोर गद्दी छोड़" का नारा देकर यह बताने की कोशिश की है कि अब कांग्रेस अकेला चलने की राह पकड़ सकती है. ऐसे में वह कोई ना कोई रास्ता अख्तियार कर सकती है. 2026 में बंगाल का चुनाव है तो 2027 में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रस्तावित है. बंगाल में कांग्रेस कितनी मजबूती से उतरेगी, इस पर तो संदेह है, लेकिन उत्तर प्रदेश में वह जरूर अपनी खोई जमीन को तलाशने की कोशिश करेगी.
ऐसे में प्रशांत किशोर से मुलाकात किस ढंग से काम करेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. वैसे भी बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर ने अपने राजनीतिक एजेंडा पर सबको चलने को मजबूर किया. भले ही उनकी पार्टी जनसुराज चुनाव हार गई, लेकिन सभी दलों ने लगभग उनके एजेंडे पर ही चुनाव प्रचार किया. हालांकि प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर ने मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात बताकर राजनीतिक अटकलें पर विराम लगाने की कोशिश की है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह मुलाकात काफी दिलचस्प है. क्योंकि प्रशांत किशोर और कांग्रेस का रिश्ता 36 का रहा है. प्रशांत किशोर 2021 में जदयू से निकलने के बाद कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव दिया था.
2022 में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत भी शुरू हुई. प्रशांत किशोर ने पीपीटी प्रेजेंटेशन भी दिया था, लेकिन बात आगे नहीं बनी. सूत्र बताते हैं कि सोनिया गांधी ने एक ग्रुप बनाया था और इस ग्रुप में प्रशांत किशोर को शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन प्रशांत किशोर ठुकरा दिया. क्योंकि वह अधिक स्वतंत्रता चाहते थे. अब जबकि बिहार में कांग्रेस की स्थिति डामाडोल है, उत्तर प्रदेश में भी स्थिति ठीक नहीं है. ऐसे में कांग्रेस जरूर चाहेगी कि कोई नया रास्ता पकड़ा जाए और उस रास्ते में प्रशांत किशोर कितने कारगर साबित हो सकते है. यह देखने वाली बात होगी. फिलहाल प्रशांत किशोर भी बिहार में चुनाव हारने के बाद निश्चित रूप से कमजोर पड़े है.
वैसे पिछली बार बंगाल चुनाव के बाद ही उन्होंने घोषणा की थी कि अब वह रणनीतिकार का काम नहीं करेंगे. फिर उन्होंने बिहार में एक नई पार्टी बनाई और बिहार के लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें एक भी सीट नहीं मिली. वोट प्रतिशत भी संतोषजनक नहीं रहा. वैसे, प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि वह बिहार छोड़कर नहीं जाएंगे और 15 जनवरी के बाद वह फिर से पदयात्रा शुरू करेंगे. इस बीच प्रियंका गांधी से मुलाकात कई सवालों को जन्म दे दिया है. इन सवालों का उत्तर समय ही दे पाएगा. वैसे भी बिहार अभी पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. 2025 में एनडीए की हुई बंपर जीत से भाजपा उत्साहित है. इधर, भाजपा ने बिहार के मंत्री नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया है. इससे बिहार की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
