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क्या जोशीमठ के जैसे काल में समा जाएगा कोयलांचल, रोज आते हैं जमीन धंसने के कई मामले

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:54:55 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): आग झरिया शहरी क्षेत्र की ओर बढ़ती जा रही है. धनुडीह, लिलोरीपथरा, बालूगद्दा, छलछलिया धौड़ा, एनएस लोदना, कुजामा, मोहरीबांध, नार्थ तिसरा, साउथ तिसरा, गोलकडीह, बागडीगी, लोदना, जयरामपुर, जीनागोरा, जियलगोरा, बरारी, शराफतपुर, भौंरा, सुदामडीह, दोबारी, बेरा, सहाना पहाड़ी, राजापुर, बस्ताकोला, बोका पहाड़ी, एना, भगतडीह, भालगोरा होरलाडीह, सुराटांड़, इंदिरा चौक, बनियाहीर आदि क्षेत्रों में जमीनी आग दशकों से लगी हुई है. लिलोरीपथरा में तो शनिवार की रात को आग भड़क गई है.

देश में अभी जोशीमठ का क्या हाल हुआ यह किसी स छुपा नहीं है. जोशीमठ में बने घरों में दरार पड़ने के साथ ढहने लगी. जिसके बाद जोशीमठ में घरों को खाली कर लोगों को पलायन करना पड़ा. लेकिन क्या इसके बाद भी सरकार ने ऐसे अन्य शहरों को बचाने के लिए कोई शुरुआत किया? या सरकार किसी बड़ी घटना के होने का इंतज़ार कर रही है? यह सवाल इस लिए कर रहें है क्योंकि झारखंड में कोयलांचल की जमीन जगह-जगह अब धंसने लगी है. क्या जमीन धंसने के पीछे का कारण आपको पता है? यहां जमीन इसलिए धंस रही है क्योंकि खनन तो किया गया लेकिन उसमें भराई जितनी करनी थी, नहीं की गई.

भरावट में भी होता है घोटाला

दरअसल, जहां से कोयले का खनन कर कोयला निकाला जाता है. उस जगह की भरावट भी कराना पड़ता है, ताकि जमीन धंसे नहीं. लेकिन यहां कोयले में घोटाले और अवैध खनन का खेल तो चलता ही है. इसके अलावा भरावट में भी घोटाला होता है. करोड़ों में इसका टेंडर किया जाता है. लेकिन यह भरावट ठीक तरीके से नहीं किया जाता है. बस खानापूर्ति के ठेकेदार निकल जाते हैं, और जिन्हें जांच कर बिल पास करने का जिम्मा होता है, उन्हे भी इसका हिस्सा पहुंच जाता है. बस फिर अधिकारी को क्या किसी की जान जाए या घर जमीन में समा जाए, उन्हें तो बस अपना हिस्सा चाहिए.

कोयलांचल की जमीन हो चुकी खोखली

कोयलांचल में ऐसे कई उदाहरण मिले हैं, जिससे यह साबित होता है कि कोयलांचल की जमीन खोखली हो चुकी हैं. इस जमीन में कभी भी कोयलांचल का कुछ हिस्सा समा सकता है. बावजूद सभी चैन की निंद्रा में है. 2017 में झरिया में जमीन धंसने से पिता पुत्र उसमें समा गए थे, जिसके बाद दोनों का शव भी नही निकल सका था. इसके अलावा बीच सड़क पर एकाएक जमीन धंस गयी और उसमें एक साढ़ समा गया. लोगों ने लाख कोशिश की उसे बाहर निकालने की, लेकिन वह निकल नहीं सका, ऐसे और भई कई घटना हैं.

रोज करीब 85 हजार टन वैध कोयले का होता है खनन

बीसीसीएल और ईसीएल की खदानों से हर रोज करीब 85 हजार टन कोयला निकलता है, वहीं अवैध तरीके की बात करें तो लगभग आठ से दस हजार टन कोयला निकाला जाता है. बेतहाशा कोयले का खनन किया जा रहा है. वैध कोयला निकालने के बाद अधिकारी और अवैध निकालने के बाद माफिया उसकी परवाह नहीं करते कि उस जगह का बाद में क्या होगा. उन्हें सिर्फ खनन से मतलब होता है. ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं होगा जब कोयलांचल का कई हिस्सा इतिहास में ही रह जायेगा.

रिपोर्ट: समीर हुसैन/सत्यभूषण सिंह

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