TNP DESK-: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में भी बड़ा धमाका करने की तैयारी में हैं. यूपी में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में भी चिराग पासवान की पार्टी पूरी तरह से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. यूपी में लगे एक पोस्टर की खूब चर्चा हो रही है उस पोस्टर में लिखा गया है-- "क्यों मांगे नेता उधार - जब अपना नेता है तैयार" इसका मतलब साफ है कि दलित समाज के रूप में चिराग पासवान अपने को उत्तर प्रदेश में साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. इस नारे के और भी मतलब निकाले जा सकते है.
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीट पर चुनाव होने हैं
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा की सीट हैं. लोजपा (रामविलास) के सांसद ने हाल ही में यह संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है. पार्टी केवल पूर्वांचल या बिहार से सटे इलाकों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे प्रदेश में दलित, वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज बनने की तैयारी में है. पार्टी अब बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने में लगी हुई है. माना जा रहा है कि बिहार की राजनीति में अपने को साबित करने के बाद चिराग पासवान उत्तर प्रदेश में भी दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं. लखनऊ की सड़कों पर चिराग पासवान की पार्टी "पोस्टर वार" भी छेड़ दिया है.
अगर चुनाव तक चिराग पासवान अडिग रहते हैं तो क्या होगा
अब चर्चा तेज हो गई है कि अगर चुनाव तक चिराग पासवान अपने निर्णय पर अडिग रहे तो किसका खेल बिगाड़ सकते हैं. इधर, उत्तर प्रदेश में बसपा कमजोर हो रही है. ऐसे में क्या चिराग पासवान की नजर बसपा के वोट बैंक पर है? अखिलेश यादव का भी जोर पिछड़ा , दलित और अल्पसंख्यक पर है. वह भी 2024 के फार्मूले पर ही 2027 में मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. चिराग की एंट्री दलित वोटो को भी अखिलेश की तरफ जाने से रोक सकती है. चिराग पासवान अगर सचमुच चुनाव लड़ते हैं ,तो बीजेपी को भी नुकसान हो सकता है. यह अलग बात है कि चुनाव आते-आते अभी कई समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगें। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या बढ़ाई गई है और यह संख्या बढ़कर अब साठ हो गई है. चुनाव के पहले मंत्रिमंडल विस्तार को भी 2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.