दुमका (DUMKA): स्थानीय लोगों के विरोध के बाबजूद कुछ दिन पूर्व दुमका रेलवे स्टेशन स्थित कोयला डंपिंग यार्ड से कोयले की ढुलाई शुरू कर दी गई. इधर, स्थानीय लोगों का विरोध जारी है. इस बीच आसनसोल रेल डिवीज़न के डीआरएम ने कहा कि प्रदेश की उपराजधानी को आर्थिक राजधानी बनाने की दिशा में रेल मंत्रालय का यह एक कदम है. आखिर लोग क्यों कर रहे हैं इसका विरोध, जानिये THE NEWS POST की इस खास रिपोर्ट में...
16 अप्रैल 1853 को भारत मे रेल सेवा की शुरुआत हुई. 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ. स्वतंत्र भारत में सुलभ और सस्ती परिवहन सुविधा आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पूरे देश मे रेल पटरियों का जाल बिछाया जाने लगा. इसके बावजूद झारखंड की उपराजधानी दुमका आजादी के दशकों बाद तक रेलवे के नक्शे पर नहीं आ पाया. 12 जुलाई 2011 को दुमका रेलवे स्टेशन से यात्री ट्रेन सेवा की शुरुआत हुई. सेवा शुरू होने के साथ ही स्थानीय लोग लंबी दूरी की ट्रेन सेवा की मांग कर रहे हैं. रांची और कोलकाता जैसे शहरों के लिए इस स्टेशन से ट्रेन जरूर गुजरती है. लेकिन देश की राजधानी सहित अन्य महानगरों के लिए रेल सेवा की मांग अब भी जारी है.
इस सबके बीच रेलवे ने दुमका रेलवे स्टेशन को वाणिज्यिक केंद्र बनाने की शुरुआत की. गुड्स ट्रैन के लिए नया ट्रैक बिछाया गया. कुछ दिन पूर्व दुमका में नवनिर्मित कोयला डंपिंग यार्ड से ट्रेन से कोयले की धुलाई शुरू कर दी गयी. जब डंपिंग यार्ड बनाने की सूचना लोगों को हुई तो लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया, लेकिन निर्माण कार्य जारी रहा. इस बीच लोगों ने प्रदूषण के मुद्दे पर एनजीटी में पीआईएल दायर किया, जिसका मामला अभी एनजीटी में लंबित है. कोयला डंपिंग यार्ड के शुरू होने से लोगों को जो अंदेशा था वो अब सच साबित होने लगा. सघन अधिवास के बीच डंपिंग यार्ड के चालू होने से लोग धूल से परेशान है. लोगों का आरोप है कि एनजीटी से बगैर एनओसी मिले ही कोयला ढुलाई का कार्य शुरू कर दिया गया.
दुमका रेलवे स्टेशन आसनसोल रेल डिवीज़न में आता है. 15 सितंबर को आसनसोल रेल मंडल के डीआरएम परमानंद शर्मा दुमका पहुचे. कोयला डंपिंग यार्ड का विरोध कर रहे रसिकपुर मुहल्ला के लोगों ने उन्हें ज्ञापन सौपकर अपना विरोध जताया. डीआरएम ने नवनिर्मित डंपिंग यार्ड का निरीक्षण किया। प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया. निरीक्षण के पश्चात मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की उपराजधानी को आर्थिक राजधानी बनाने की दिशा में यह एक कदम है. एनजीटी से एनओसी नहीं मिलने के बाबत डीआरएम ने कहा कि इसका एनओसी एनजीटी से नहीं बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिल चुका है. उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए आम लोगों से सहयोग की अपील की.
यह सत्य है कि विनाश की शर्त पर ही विकास की बुनियाद खड़ी होती है. समय की मांग के अनुरूप देश मे कई कल कारखाने लगे. प्रदूषण, विस्थापन जैसी समस्या का दंश आज भी लोग झेल रहे हैं. इसके बाबजूद औद्योगिकीकरण का दौर जारी है. दुमका रेलवे स्टेशन पर कोयला सड़क मार्ग से पाकुड़ से आता है. बेहतर होता अगर यह डंपिंग यार्ड शिकारीपाड़ा या मदनपुर में बनता. लेकिन अब जब यहां से कोयला की ढुलाई शुरू हो चुका है तो इसे यहां से हटाना इतना आसान भी नहीं. वैसे स्थानीय लोगों का कहना है कि लड़ाई जारी रहेगी.
रिपोर्ट: पंचम झा
