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धनबाद के माथे से भस्मासुर का हाथ हटाना क्यों जरुरी हो गया है, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: September 5, 2024,
Updated: 11:06 AM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद के माथे पर सचमुच भस्मासुर का हाथ पड़ा हुआ है. भस्मासुर का हाथ कब हटेगा, कौन हटाएगा, यह कहना मुश्किल है. हावड़ा- नई दिल्ली रेल लाइन को बने 100 साल से भी अधिक हो गए. लेकिन धनबाद को अब तक नई दिल्ली के लिए भी ट्रेन नहीं मिली है. यह  स्थिति तब है, जब धनबाद रेलवे का सबसे कमाऊ पुत्र है. सीधी ट्रेन की मांग करते-करते कई सांसद अब पूर्व सांसद हो गए. कई रेल अधिकारी रिटायर कर गए, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई. कभी कहा जाता है कि धनबाद ढुलाई  का स्टेशन है. इसलिए अगल-बगल के स्टेशनों से ट्रेन दी जाती है. रेलवे कभी यह आकलन करने का प्रयास नहीं करता है कि धनबाद से रेल यात्रियों से कितना राजस्व रेलवे को मिलता है. 

धनबाद की मांग को की जाती रही है अनसुनी 
 
धनबाद लगातार मांग करता रहा है  कि सीधी ट्रेन दी जाए, लेकिन अब तक नहीं मिली है. लेकिन इधर कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि धनबाद से दिल्ली और धनबाद से मुंबई के बीच नई ट्रेन चलने की उम्मीद बढ़ी है. कई दशक से यह मांग उठती रही है, लेकिन इस मांग को कहीं ठौर नहीं मिला है. बात सिर्फ इतनी नहीं है, मंडल संसदीय समिति की बैठक के जरिए दोनों जगह के लिए सीधी ट्रेन का प्रस्ताव भेजे जाते रहे है. इधर, जाकर भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री और कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी ने धनबाद से दिल्ली और धनबाद से मुंबई के बीच नई ट्रेन चलाने की मांग की है. इस संबंध में अन्नपूर्णा देवी ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर ट्रेनों की जरूरत का उल्लेख किया है. कोडरमा सांसद ने रेल मंत्री को बताया है कि झारखंड राज्य के अधिकांश लोग पारिवारिक दायित्व का निर्वहन करने के लिए रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे प्रदेशों में जाते है. वहां रहते हैं,लेकिन उनका संबंध इस इलाके से लगातार बना रहता है. 

त्योहारों में बड़ी संख्या में लोग धनबाद आते है 
 
त्योहारों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग अपने घर आते है. ट्रेन की सुविधा नहीं होने से त्यौहार में उन्हें काफी परेशानी होती है. उन्होंने धनबाद से मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन ट्रेन चलाने की मांग की है. साथ ही धनबाद से दिल्ली के बीच कोडरमा होकर सप्ताह में 3 दिन नई ट्रेन चलाने का प्रस्ताव दिया है. सूचना निकलकर आ रही है कि इस प्रस्ताव पर कार्रवाई आगे बढ़ रही है, लेकिन देखना होगा कि कब तक धनबाद को नई ट्रेन मिल पाती है. धनबाद को भले ही धन  से आबाद कहा जाता हो, भले ही यहां का रेल मंडल देश का नंबर एक कमाऊ पूत हो ,भले ही धनबाद रेल मंडल की कमाई से रेल मंत्रालय की  छाती चौड़ी होती हो, लेकिन धनबाद को सुविधाओं के लिए तरसाया जाता है. एयरपोर्ट तो है नहीं, शहर के भीतर भी ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था भगवान भरोसे है, ट्रेनों का भी वही हाल है. 
 
सिंदरी के एक सीनियर सिटीजन ने पत्र में कहा था कि ----

 सिंदरी के एक सीनियर सिटीजन ने पत्र लिखकर कहा था  कि धनबाद को बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली ,पुणे, पुरी की सीधी ट्रेन नहीं है.  रेलवे ने कुछ ट्रेनों को एक्सटेंशन दिया है.    एक्सटेंशन से यात्रियों को सुविधा होगी.  लेकिन धनबाद के लोगों के लिए भी कुछ  सुविधाएं जरुरी है.  मांग की गई   थी  कि जिस तरह से ट्रेनों को एक्सटेंशन दिया गया है, उसी  तरह हटिया -पुणे, हटिया -कुर्ला,  हटिया -पुरी सहित अन्य उपयोगी ट्रेनों  को धनबाद तक एक्सटेंड कर दिया जाए, तो धनबाद के लोगों को बहुत सहूलियत होगी.  इसके लिए रेलवे को कोई अतिरिक्त सुविधाएं बढ़ाने की भी जरूरत भी  नहीं होगी.  वैसे, भी धनबाद का सीधा संबंध देश के बड़े-बड़े शहरों  से है.  यहां के लोग बाहर जाने के लिए लंबी दूरी तय करते है.  एरोप्लेन की बात कौन कहे, ट्रेन पकड़ने के लिए भी लोग  रांची, जमशेदपुर और आसनसोल तक जाते है.  फिर यह धनबाद के साथ रेल का  कैसा न्याय है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadDelhiTrainIncomeMantri

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