धनबाद(DHANBAD) : झारखंड के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा अपना दायरा बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है. बिहार के चुनाव में धोखा मिला, इस वजह से झामुमो उम्मीदवार नहीं खड़ा कर सका. बिहार महागठबंधन के नेता अंतिम समय में गड़बड़ कर दिए. झारखंड मुक्ति मोर्चा बिहार से सटे 12 विधानसभा क्षेत्र में दावेदारी कर रहा था. लेकिन उसे एक भी सीट नहीं दी गई. इसके बाद झारखंड में महागठबंधन टूटने की भी चर्चा चली. कांग्रेस और राजद से नाराजगी की भी बात आई. इधर, फिर जैसी की चर्चा है कि झामुमो असम और बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में दावेदारी कर सकता है. पार्टी के प्रत्याशी को उतार सकता है.
असम के आदिवासियों से गुरु जी का था लगाव
आदिवासी बहुल इलाकों में झामुमो अकेले चुनाव लड़ सकता है. यह संकेत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुमका में मंगलवार को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक विचार है, इस विषय में पार्टी जो तय करेगी, उसके हिसाब से काम होगा। मुख्यमंत्री का कहना था कि असम के क्षेत्र में पूर्व से ही गुरु जी का आना-जाना लगा रहता था. वहां के लोग पहले से ही झामुमो को जानते -पहचानते है. असम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग रहते है. असम का चाय कारोबार आदिवासियों के कंधे पर है. अलग-अलग राज्यों के आदिवासियों को काम लेने के लिए वहां बसा दिया गया है.
असम के आदिवासी अपनी मान्यता के लिए जद्दोजहद कर रहे
अब वह अपनी मान्यता के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. जहां-जहां भी आदिवासी समुदाय के लोग बसे हैं, उन्हें झामुमो पर भरोसा है. हम लोग उनकी आवाज बनने की कोशिश करेंगे। दरअसल, झामुमो अब अपना दायरा बढ़ाना चाहता है. झारखंड से बाहर मजबूती से निकलना चाहता है. बंगाल के कई विधानसभा क्षेत्र भी झारखंड से सटे हुए हैं. ऐसे में बंगाल में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकता है. हो सकता है कि ममता दीदी से झामुमो गठबंधन करें या फिर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़े
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
