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बाहुबली परिवार के संजीव सिंह को जमानत के बाद धनबाद घुसने पर कोर्ट ने क्यों लगायी पाबंदी, जानिए इनसाइड  स्टोरी !

बाहुबली परिवार के संजीव सिंह को जमानत के बाद धनबाद घुसने पर कोर्ट ने क्यों लगायी पाबंदी, जानिए इनसाइड  स्टोरी !

धनबाद (DHANBAD) : झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद वह बाहर आ गए. इधर, धनबाद के ट्रायल कोर्ट में दोनों पक्षों की गवाही और बहस पूरी हो गई है और फैसले की तिथि निर्धारित की गई है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद संजीव सिंह रांची के रिनपास से रिहा तो हो गए लेकिन उन्हें धनबाद लौटने पर रोक है. लिहाजा वो रांची में अपने परिवारजनों के साथ स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उन्हें बेहतर चिकित्सा की दरकार है. अपने चचेरे भाई पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले में 8 साल से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली है. संजीव सिंह का वनवास कब खत्म होगा और उनकी सिंह मैंशन  में वापसी कब होगी, ये पूरे मामले के फैसले पर निर्भर करेगा. 

21 मार्च 2017 को धनबाद में नीरज सिंह की हुई थी हत्या

21 मार्च "2017 को धनबाद के सरायढेला के स्टील गेट में नीरज सिंह, उनके पीए अशोक यादव,ड्राइवर घल्टू महतो और अंगरक्षक मुन्ना तिवारी की हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने कोयलांचल को झकझोर दिया था. हत्याकांड में गोलियों की बारिश की गई थी. 21 मार्च '2017 को नीरज सिंह अपनी गाड़ी से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान घात लगाए अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी.  सैकड़ो राउंड फायरिंग की गई. घटनास्थल पर ही चारों लोगों की मौत हो गई थी.   इस घटना के बाद कोयलांचल में सन्नाटा पसर गया था.  झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने  थाने में सरेंडर किया था. इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था.

हत्या कांड में शूटरों के तार उत्तरप्रदेश से जुड़े

घटना में शूटरों के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े. इसी मामले में अमन सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस ले आई थी. अमन सिंह की हत्या धनबाद जेल में तीन दिसंबर 2023 को कर दी गई थी. धनबाद आने के बाद अमन सिंह गैंगस्टर बन गया था. नीरज  सिंह की हत्या के बाद 2019 में झरिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर उनकी पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह चुनाव लड़ी और संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह को पराजित कर दिया था. कांग्रेस के टिकट पर वह 2019 में विधायक बनी. नीरज सिंह हत्याकांड के बाद झारखंड के ताकतवर घराने सिंह मेंशन और रघुकुल के बीच की खाई और बढ़ गई. पारिवारिक विवाद इतना अधिक बढ़ा कि सिंह मेंशन परिवार के लोग कई गुटों में बट गए और एक दूसरे  को देखना पसंद नहीं करने लगे.  

हत्याकांड का कोयलांचल की राजनीति पर पड़ा था बड़ा प्रभाव 

इस घटना का असर राजनीति पर भी पड़ा. सिंह मेंशन झारखंड का ताकतवर घराना माना जाता है. लेकिन नीरज सिंह की हत्या के बाद विवाद इस कदर बढ़ा कि सार्वजनिक तौर पर आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. इस बीच सूर्य देव बाबू के भाई पूर्व मंत्री बच्चा सिंह का बीमारी की वजह से निधन भी हो गया. बच्चा बाबू सिंह मेंशन से अलग पहले से ही रह रहे थे. रामधीर सिंह और सूर्य देव सिंह का परिवार सिंह मेंशन में रह रहा था. लेकिन बाद में रामधीर सिंह का परिवार भी अलग रहने लगा. इस बीच फिर 2024 का चुनाव आया. इस चुनाव में भी झरिया सीट पर पूर्णिमा नीरज सिंह और रागिनी सिंह के बीच आमने-सामने का चुनावी टक्कर हुई. चुनाव के इस रण में इस बार रागिनी सिंह ने बाजी मार ली और पूर्णिमा नीरज सिंह को उन्होंने पराजित कर दिया. रागिनी सिंह फिलहाल झरिया विधानसभा सीट से भाजपा की विधायक है.

जमानत पर रिहा होने के बाद पूर्व विधायक पूर्णिमा सिंह ने दी थी प्रतिक्रिया 

झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के  जमानत पर रिहा होने के बाद पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह की प्रतिक्रिया भी आई थी. उन्होंने  सोशल मीडिया एक्स  पर पोस्ट किया था. पूर्णिमा नीरज सिंह ने लिखा था-कि जो भूल गए हैं, उन्हें याद दिला दूं कि चार लोगों की हत्या हुई थी. तीन औरतें एक साथ विधवा हुई थी. चार माताओं ने एक पल में अपने बेटे को खो दिए थे. चार परिवार उजड़ गए, अपने ही परिवार के सदस्य की हत्या की, कुलघात किया. कालांतर में अनेक परिवारों को उजड़ने का कारण बना. और ऐसा करने वालों के लिए इस समाज का एक पक्ष छाती पीटकर खुशियां मना रहा है. तो हम सबको अपनी अंतरात्मा में झांक कर देखने की जरूरत है. उन्होंने अपने पोस्ट में रामधारी सिंह दिनकर की कविता का भी उल्लेख किया था. कहा था -समर शेष है,अहंकार इनका हरना बाकी है. वृक  को दंतहीन, अहि को निर्विष करना बाकी है. आगे लिखा है - समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल ब्याघ , जो तटस्थ है ,समय लिखेगा उनका भी अपराध. पूर्णिमा नीरज सिंह ने अपने पोस्ट में मारे गए चार लोगो का फोटो भी पोस्ट किया था.  

सुप्रीम कोर्ट से संजीव सिंह की जमानत की शर्त 

संजीव सिंह को मिली सशर्त जमानत में कहा गया है कि वह धनबाद में प्रवेश नहीं करेंगे, अगर ट्रायल कोर्ट उन्हें बुलाए तो वह धनबाद कोर्ट जा सकते है. जमानत मिलने के बाद संजीव सिंह को रिनपास से छुट्टी मिली थी. अब संजीव सिंह के परिजनों के साथ कोयलांचल की आंखे ट्रायल  कोर्ट के फैसले पर टिकी है.
 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो

Published at:17 Aug 2025 10:58 AM (IST)
Tags:DhanbadSanjeev SinghJamanatMukadamaDate
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