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स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड पर प्रोडक्शन के दबाव का खामियाजा क्यों भुगत रहे अधिकारी, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 11:12:01 PM

धनबाद(DHANBAD) : स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (सेल ) मैनेजमेंट के सख्त कदम से अधिकारियों में हड़कंप है. अधिकारी यह समझ नहीं पा रहें कि आखिर मैनेजमेंट इस तरह का सख्त रवैया क्यों अपना लिया है? क्या सेल मैनेजमेंट पर उत्पादन का दबाव बढ़ गया है? क्या 2030 तक देश में स्टील का उत्पादन 300 मिलियन टन का दबाव अभी से ही दिखने लगा है? इसका असर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में सामने आ रहा है.  बता दें कि सेल के इतिहास में पहली बार मैनेजमेंट ने 11 अधिकारियों को प्रीमेच्योर रिटायरमेंट दे दिया है. इस कार्रवाई में कोलियरी डिविजन, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड(सेल ), बोकारो स्टील लिमिटेड के अधिकारी शामिल है. 
 
सेल के इतिहास में पहली बार इस तरह की कार्रवाई

सेल के इतिहास में पहली बार इस तरह की कार्रवाई की गई है. सूत्र बताते हैं कि इन सभी अधिकारियों को 3 महीने का नोटिस दिया गया है. हालांकि यह भी बताया जाता है कि इस कार्रवाई का उनके रिटायरमेंट सुविधा पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा. यह भी पता चला है कि सभी अधिकारी महाप्रबंधक स्तर के ऊपर के अधिकारी है. धनबाद के चासनाला  के भी अधिकारी इसमें शामिल बताए गए है. सूत्र बताते है कि  सेल पर स्टील उत्पादन का बड़ा दबाव है. सेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए जरुरी कोयला के लिए कोल इंडिया की  कोकिंग कोल वाशरी को भी तैयार किया जा रहा है.   

कोयलांचल में सेल की भी अपनी कोयला खदानें है जरूर लेकिन 

वैसे, तो कोयलांचल में सेल की भी अपनी कोयला खदानें है. लेकिन वहां जो कोयले का प्रोडक्शन होता है, उससे  बोकारो स्टील प्लांट की जरूरत पूरी होगी, इसमें संदेह है. जानकारी के अनुसार अमूमन 1.4 मिलियन टन स्टील के प्रोडक्शन के लिए एक मिलियन टन कोकिंग कोयले की जरूरत होती है. बोकारो स्टील प्लांट को विस्तार देकर 2.3 मिलियन टन उत्पादन बढ़ाना है. यानी लगभग 2 मिलियन टन कोकिंग कोल की आवश्यकता हो सकती है. अपने दौरे में बोकारो इस्पात संयंत्र को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमार स्वामी और राज्यमंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना 2030 तक भारत में इस्पात उत्पादन 300 मिलियन टन करने का है. इस दिशा में निवेश व तकनीक का वृहत इस्तेमाल होगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी.  

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DhanbadSailOfficerActionProduction

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