दुमका(DUMKA): अलग झारखंड राज्य बने 22 वर्ष बीत गए. इन 22 वर्षों में कई सरकारें आयी और चली गयी. लेकिन कुछ ऐसे कार्य है जो अभी तक नहीं हो पाया है. उसी में एक है परिवहन विभाग की नियमावली ना बनना. सुनकर आप भी सोच रहे होंगे कि झारखंड की सड़कों पर गाड़ियां दौड़ रही है. प्रत्येक महीने सरकार को राजस्व के रूप में मोटी रकम मिल रही है. लेकिन सरकार को राजस्व वसूल कर देने वाले परिवहन विभाग के कर्मी परेशान है. इसको लेकर झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिलोकी नाथ मिश्रा ने कृषि मंत्री बादल पत्रलेख को ज्ञापन सौंपकर नियमावली बनाने की दिशा में सार्थक पहल करने की मांग की है. प्रदेश उपाध्यक्ष ने बताया कि नियमावली ना बनने से कर्मी को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है. इस कारण एक तरफ जहां आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं मानसिक परेशानी भी झेलना पड़ रहा है.
मंत्री ने दिया समाधान का भरोशा
इस बाबत मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ द्वारा प्रेषित ज्ञापन से विभागीय मंत्री को अवगत कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हर किसी को न्याय देना सरकार का लक्ष्य है. उन्होंने जल्द ही समस्या के समाधान का भरोसा दिया.
सरकार से जल्द निर्णय लेने की उम्मीद
राज्य बने 22 वर्ष बीत गए. 22 वर्ष कम नहीं होता किसी भी नियम को बनाने में. इसके बावजूद परिवहन विभाग का नियमावली ना बनना यह दर्शाता है कि हर महीने राजस्व वसूल कर सरकार का खजाना भरने वाले परिवहन विभाग के कर्मी के प्रति सरकार कितनी संवेदनशील है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही सरकार इस पर निर्णय लें अन्यथा परिवहन विभाग के कर्मी का सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है.
रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका