✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

किनकी कल्पना से तिरंगा हुआ जीवंत, जानिए इसका सौ साल पुराना इतिहास

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:22:39 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देश इस साल आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है. आजादी का अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस को खास बनाने के लिए सरकार 'हर घर तिरंगा' कैंपेन चला रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों से हर घर तिरंगा अभियान मनाने की अपील की है. आज से यानि 13 अगस्त से 15 अगस्त तक लोग अपने-अपने घरों पर तिरंगा झंडा फहराएंगे. लेकिन इस तिरंगे के पीछे की कहानी क्या है शायद ये बहुत कम लोगों को ही पता हो.  जिस तिरंगे को लोग इतना सम्मान देते हैं, जिसे देखते ही मन में राष्ट्रप्रेम की भावना उमड़ पड़ती है, वो तिरंगा हमेशा से ऐसा नहीं था. समय के साथ इसमें काफी सारे बदलाव हुए हैं. आपको बता दें कि 116 सालों में भारत का झंडा कुल 6 बार बदला जा चुका है. आइए जानते हैं भारत के झंडे का पूरा इतिहास कि इसमें कब-कब और क्या-क्या बदलाव हुए. आखिरी बदलाव 1947 में हुआ था. 

भारत को पहला झंडा 1906 में मिला 

भारत को पहला झंडा 1906 में मिला. कोलकाता के पारसी बागान चौक पर पहली बार सात अगस्त को झंडा फहराया गया था. इस झंडे में तीन रंग की पटि्टयां थीं, हरा, पीला और लाल. सबसे ऊपर हरी पट्टी में आठ कमल के फूल थे. वहीं पिली पट्टी पर नीले रंग से वन्दे मातरम लिखा हुआ था. जबकि सबसे नीचे लाल पाती पर चाँद और सूरज बनाया गया था. 

दूसरा झंडा 1907 में पेरिस में फहराया गया 

भारत का पहला झंडा बहुत दिनों तक नहीं रहा. महज एक साल में ही फिर से इसमें बदलाव किया गया. 1907 में पेरिस में नया झंडा बनाया गया. मैडम कामा और उनके क्रन्तिकारी साथी जिन्हें भारत से निर्वासित कर दिया गया था उनलोगों ने ही पेरिस में भारत के इस नए झंडे को फहराया. इस झंडे में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं किया गया था. काफी हद तक यह झंडा देखने में पहले जैसा ही था. इस झंडे में केसरिया, पीला और हरे रंग की पट्टियां थीं. बीच में वन्दे मातरम् लिखा गया था. वहीं, इसमें चांद और सूरज के सात आठ सितारे बने थे. 

तीसरा नया झंडा 1917 में  फहराया गया 

1917 में फिर  से भारत के झंडे का रंग बदल गया. इस नए झंडे में पांच लाल और चार हरे रंग की पट्टियां थी. झंडे के अंत की ओर इसके साथ ही इसमें सप्तऋशि को दर्शाते सात तारे अर्द्ध चंद्र सितारे थे. इस झंडे में बाएं साइड कोने में यूनियन जैक भी था. डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने इस नए झंडे को फहराया. 

चौथा झंडा 1921 में मिला 

करीब एक दशक बाद 1921 में ही भारत को अपना चौथा झंडा भी मिल गया. अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के सेशन के दौरान आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को यह झंडा दिया था. गांधी ने इसमें कुछ संशोधन भी करवाया. जिसके बाद इसमें सफेद, हरे और लाल रंग की पट्टियां थीं. वहीं देश के विकास को दर्शाने के लिए बीच में चरखा भी था.

1931 में एक बार फिर से बदला झंडा

1931 में एक बार फिर से भारत का झंडा बदला. इस झंडे को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपनाया था. इस झंडे में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं. हालांकि चरखा इस बार भी केंद्र में था.   इसमें छोटे आकार पूरा चरखा बीच की सफेद पट्टी रखी गई थी.

आखिरकार 1947 में देश को मिला तिरंगा

1947 में जब देश आजाद हुआ तो देश को तिरंगा झंडा मिल. 1931 में बने झंडे को ही एक बदलाव के साथ 22 जुलाई, 1947 में संविधान सभा की बैठक में भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया. इस ध्वज में चरखे की जगह सम्राट अशोक के धर्म चक्र को गहरे नीले रंग में दिखाया गया है. 24 तीलियों वाले चक्र को विधि का चक्र भी कहते हैं.  इसे पिंगली वैंकेया ने तैयार किया था.  इसमें ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की पट्टी है. 

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.