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कौन हैं प्रदीप यादव, जिन्हें कांग्रेस ने गोड्डा से निशिकांत के खिलाफ बनाया प्रत्याशी

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 5:54:53 AM

रांची (RANCHI) : गोड्डा में इस बार फिर निशिकांत दुबे के खिलाफ प्रदीप यादव चुनाव में ताल ठोकते हुए नजर आएंगे. कांग्रेस ने पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव पर भरोसा जताते हुए गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है. उनका सामना तीन बार के सांसद बीजेपी उम्मीदवार निशिकांत दुबे से होगा. बता दें कि पहले कांग्रेस ने महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उनका टिकट काटकर प्रदीप यादव पर भरोसा जताया.

प्रदीप यादव का राजनीतिक सफर

कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव का जन्म 16 जनवरी 1966 को बोहरा में हुआ था. प्रदीप यादव के पिता का नाम अशोक कुमार यादव और मां का नाम सावित्री देवी है. उनकी पत्नी नाम वीणा देवी है. उनके दो बच्चे हैं. 58 साल के प्रदीप यादव वर्तमान में पौड़ैयाहाट से विधायक हैं. उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन एक छात्र नेता के रूप में शुरू किया था. बाद में भाजपा के टिकट पर 2002 के उपचुनाव में सांसद बने थे. वह दो बार राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुके हैं. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बाबूलाल मरांडी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे. दूसरी बार वह अर्जुन मुंडा की सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाला था. 2007 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से नाता तोड़कर झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) गठन किया था. उस समय वे भी बीजेपी छोड़कर झाविमो में शामिल हो गए थे. लोकसभा चुनाव 2019 में झाविमो के टिकट पर प्रदीप यादव चुनाव लड़े थे. उस समय उन्हें 4 लाख 50 हजार वोट मिला था और वे दूसरे स्थान पर रहे थे. इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव में प्रदीप यादव ने भाजपा के प्रत्याशी गजाधर सिंह 13,527 मतों से पराजित किया. वे लगातार पांचवीं बार विधायक बनें. बाद में बाबूलाल की पार्टी भाजपा में विलय हो गया था. इसके बाद प्रदीप यादव कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इस बार वे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे हैं.

करोड़पति हैं कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव

गोड्डा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव करोड़पति हैं. उनकी कुल संपत्ति करीब 1.42 करोड़ है. देनदारियां कुछ भी नहीं है. वहीं इनके खिलाफ कुल 13 आपराधिक मामले दर्ज है. 

गोड्डा का जातीय समीकरण

गोड्डा लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इसमें मधुपुर, देवघर, जरमुंडी, पोरैयाहाट, महगामा और गोड्डा विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर बनाया गया है. गोड्डा सीट बिहार से सटा हुआ है. इसके एक तरफ भागलपुर है तो दूसरी तरफ बांका. गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में ही देवघर और बाबा धाम मंदिर आता है. ऐसे में यह सीट बेहद खास हो जाता है. 2011 के जनगणना के अनुसार गोड्डा संसदीय क्षेत्र में एससी की आबादी करीब 11.1 प्रतिशत है. एसटी मतदाताओं की संख्या 12.9 प्रतिशत है. वहीं मुस्लिम मतदाताओं की आबादी की बात करें तो इसकी संख्या करीब 21.1 प्रतिशत है. बौद्ध 0.2 प्रतिशत, जैन 0.2 प्रतिशत, सिख 0.2 प्रतिशत, ईसाई 2.67 प्रतिशत की आबादी है. गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या शहरी के मुकाबले सबसे ज्यादा है. ग्रामीण मतदाताओं की संख्या करीब 86.8 प्रतिशत है जबकि शहरी वोटरों की संख्या 13.2 प्रतिशत है. 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में करीब 69.3 प्रतिशत वोटरों ने मतदान का प्रयोग किया था, जिसमें ग्रामीणों की भागीदारी सबसे ज्यादा रही.

प्रदीप यादव को क्यों मिला टिकट

गोड्डा लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती है. जिसमें चार सीटों पर इंडिया गठबंधन का कब्जा है. वहीं दो सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं. खुद प्रदीप यादव खुद पोरैयाहाट से विधायक बनते आ रहे हैं और वे ओबीसी सामाज से आते हैं. अनुमान के मुताबिक करीब ढाई-ढाई लाख यादव, वैश्य और ब्राह्मण है. वहीं करीब साढे तीन लाख मुस्लिमों की आबादी है. कांग्रेस को उम्मीद है कि उनकी उम्मीदवारी से मुस्लिमों के साथ-साथ यादव वोटर्स भी गोलबंद हो सकते हैं. कांग्रेस की उम्मीदें यदि हकीकत में बदली तो निशिकांत के लिए जीत का चौका लगाने की राह मुश्किल हो सकती है.

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