✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

कौन है मिसिर बेसरा? कटहल विवाद से उठकर बना झारखंड का खूंखार नक्सली

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 17, 2026, 4:05:08 PM

चाईबासा (CHAIBASA): कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा एक बार फिर चर्चा में है. पिछले 3 दिनों से सारंडा के जंगल में उसका दस्ता सुरक्षाबलों से मुठभेड़ कर रहा है. मिसिर बेसरा वो कुख्यात नक्सली है जिसका नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है. झारखंड के नक्सल इतिहास में मिसिर बेसरा एक ऐसा नाम है, जिसकी कहानी एक साधारण छात्र से लेकर कुख्यात नक्सली कमांडर बनने तक का सफर दिखाती है. गिरीडीह जिले के पीरटांड प्रखंड के भगनाडीह गांव का रहने वाला मिसिर पढ़ाई-लिखाई में रुचि रखने वाला छात्र था. उसने धनबाद के पीके राय कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में स्नातक की पढ़ाई की थी. लेकिन अब वह झारखंड का कुख्यात नक्सली कहलाता है. सारंडा के जंगलों में वह अपने दस्ते के साथ कई सालों से सक्रिय है. इस दौरान उसने कई घटनाओं को अंजाम भी दिया.

कैसे बना नक्सली
1980 के दशक की शुरुआत में एक मामूली सा लगने वाला विवाद उसकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया. गांव में एक कटहल के पेड़ को लेकर हुए झगड़े और दबंगों के खिलाफ खड़े होने के बाद बेसरा का झुकाव धीरे-धीरे उग्र विचारधारा की ओर हो गया. यही घटना उसे मुख्यधारा से दूर ले गई. अक्टूबर 1985 में मिसिर बेसरा ने एक नक्सली सांस्कृतिक संगठन के कार्यक्रम में भाग लिया. यहां से उसकी सक्रियता बढ़ गई. 1987 में उसने औपचारिक रूप से हथियार उठा लिया और नक्सली संगठन के सशस्त्र विंग का हिस्सा बन गया. इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मिसिर बेसरा कई नामों से जाना जाता है. उसे भास्कर, सुनील, सुनिर्मल, सागर और विवेक नाम से भी जाना जाता है. वह संगठन के भीतर एक रणनीतिक और प्रभावशाली कमांडर के रूप में उभरा, जिसने कई बड़े हमलों की योजना बनाई.

29 पुलिस कर्मियों की हत्या कर हाईलाइट हुआ
उसके नाम से जुड़ा सबसे बड़ा और चर्चित हमला अप्रैल 2004 में पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल के बालिबा क्षेत्र में हुआ था. इस हमले में 29 से अधिक पुलिसकर्मी मारे गए थे, जिसे झारखंड के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है. एक समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बिहार के लखीसराय में कोर्ट पेशी के दौरान वह भागने में सफल रहा  इसके बाद वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा. मिसिर बेसरा की कहानी यह दिखाती है कि कैसे एक छोटी सी घटना और सामाजिक टकराव किसी व्यक्ति को हिंसा और उग्रवाद की राह पर धकेल सकते हैं.
एक करोड़ का है इनामी
मिसिर बेसरा पर एक करोड़ रुपए का इनाम भी रखा गया है. वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो का सदस्य है. वह झारखंड पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. फिलहाल वह और उसका दस्ता सारंडा के जंगलों में घिर गया है. देखना यह है कि इस बार वह पुलिस के हत्थे चढ़ेगा या भाग निकलेगा। 

Tags:SarandaWest singhbhumJharkhandJharkhand newsNaxali misir besraJamshedpurWho is Misir BesraMisir Besra NEwsMisir Besra UpdateJharkahndNAxalNaxal news

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.