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कब होगी राज्य में अपनी झारखंडी नियोजन नीति, आखिर पेंच कहां फंस रहा है?

कब होगी राज्य में अपनी झारखंडी नियोजन नीति, आखिर पेंच कहां फंस रहा है?

रांची (RANCHI) : झारखंड में लगभग सभी नियुक्ति प्रक्रिया विवादों में ही रहती है. कभी पेपर लीक का मामला सामने आता है. तो कभी नियमावली ही रद्द कर दी जाती है. दरअसल झारखंड राज्य को बने 23 साल लगभग हो गए हैं. लेकिन आज भी झारखंड के अभ्यर्थी आंदोलन करते हुए नजर आते हैं. अभ्यर्थियों का कहना रहता है कि झारखंड में जब नियोजन नीति और स्थानीय नीति स्पष्ट नहीं है तो आखिर सरकार नियुक्तियां कैसे लेगी. गौरतलब है कि 16 दिसंबर,2022 को झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की बनाई गई नियोजन नीति 2022 को रद्द कर दिया था. नियोजन नीति रद्द होने के बाद कई नियुक्तियां भी रद्द हो गई थी और झारखंड के सभी जिलों में अभ्यर्थी आंदोलनरत थे. बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा था. जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड की ही अभ्यर्थियों से पूछते हुए नजर आ रहे थे कि आखिर सरकार को किस तरीके की नियोजन नीति बननी चाहिए. लेकिन इस ऑडियो के बाद झारखंड के अभ्यर्थी एक बार फिर से आंदोलन करना शुरू कर दिए थे.

क्या था उस ऑडियो में

16 दिसंबर,2022 को राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नियोजन नीति को झारखंड हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था. उसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा था. जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के अभ्यर्थियों से पूछते हुए नजर आ रहे थे. कि आखिर सरकार को किस तरह की नियोजन नीति बननी चाहिए जो हाई कोर्ट में न फसे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2013 का जिक्र किया था. जिसके बाद राज्य में 60:40 की नीति को लेकर विरोध होना शुरू हो गया था. दरअसल 2013 से पहले की नियोजन नीति की बात करेंगे तो 60% झारखंड वासियों के लिए आरक्षित और 40% गैर झारखंड वासियों के लिए आरक्षित थे.

60:40 आखिर है क्या?

2013 से पहले की जो नीति थी उसमें 60% झारखंडवासियों के लिए आरक्षित था और 40% गैर झारखंडवासियों के लिए आरक्षित था ,लेकिन झारखंड के अभ्यर्थियों का कहना है कि झारखंड झारखंडियों के लिए है और झारखंड में बाहरी लोगों को हम एंट्री नहीं करने देंगे ,लेकिन दूसरी ओर लगातार सरकार की ओर से दावे किए जा रहे हैं कि सरकार ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को नियुक्ति देगी, दरअसल झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन ने भी स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की जयंती के दिन एक बयान दिया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि बाहरियों को भगाना है और स्थानियों को रोजगार देना है.

सरकार का दावा

बाहरी और भीतरी को लेकर लगातार झारखंड की सियासत तेज हो गई है,लेकिन सरकार की ओर से लगातार दावे किए जा रहे हैं कि सरकार स्थानीय लोगों को रोजगार देगी. बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार सभा को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा नियुक्ति झारखंडवासियों की होगी. सरकार रोजगार का रास्ता साफ करेगी और झारखंड के अभ्यर्थियों को मौका देगी.

26 हजार शिक्षक नियुक्ति भी विवादों में

राज्य सरकार लगातार यह दावे करती हुई नजर आ रही थी कि झारखंड राज्य पहला ऐसा राज्य होगा,जहां पर एक साथ 26,001 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, लेकिन दूसरी ओर नियुक्ति नियमावली को लेकर लगातार टेट पास पारा शिक्षक आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, टेट पास पारा शिक्षकों का कहना था कि इस नियुक्ति में उन्हें सीधा समायोजन चाहिए,लेकिन दूसरी ओर हाई कोर्ट ने सहायक अध्यापक नियुक्ति नियमावली पर रोक लगा दी है.नियमावली रद्द होने से सारी नियुक्तियां रद्द चुकी हैं. मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मसले पर कहा था कि सरकार सभी मुमकिन कोशिश कर रही है लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि झारखंड राज्य का भला हो. इसलिए वे लोग हथकंडे अपनाते रहते हैं लेकिन सरकार जो वादा करके आई थी उस वादे को पूरा करेगी

क्या कह रहे हैं छात्र नेता

झारखंड में लगातार नीतियों को लेकर अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आवास का घेराव करते हुए नजर आते हैं, विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने के लिए गए थे कई अभ्यर्थियों के ऊपर लाठी चार्ज की गई,और आसू गैस के गोले दागे गए थे.

मनोज यादव बताते है कि झारखंड में सरकार बाहरियों को एंट्री देना चाहती है. इस वजह से सरकार इस तरीके की नीतियां बना रही है. सरकार को यह समझने की जरूरत है कि झारखंड के अभ्यर्थी क्या चाहते हैं, वहीं छात्र नेता देवेंद्र महतो ने कहा कि सरकार को अब जल्द ही नियोजन नीति पर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है.अगर सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करेगी तो अभ्यर्थी आने वाले समय में उग्र आंदोलन भी करेंगे.

Published at:16 Sep 2023 08:12 PM (IST)
Tags:When will the state have its own Jharkhandi planning policy?Where is the problemRANCHI NEWS
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