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मां उग्रतारा नगर मंदिर में रहस्मयी सतयुगी केले के वृक्ष का क्या है राज, जानिए पूरी जानकारी

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 3:09:19 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड राज्य के लातेहार जिले में हजारों साल पुराना मां उग्रतारा का ऐतिहासिक मंदिर है. जो चंदवा प्रखंड से महज 10 किलोमीटर रांची-चतरा मुख्य मार्ग पर स्थित है. ये शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है. इस मंदिर में देवियों की मूर्तियां हैं. चकला गांव में रहनेवाले सभी लोगों की इस मंदिर से गहरी आस्था जुड़ी हुई है. मां उग्रतारा नगर मंदिर का संचालन मिश्र परिवार और चकला शाही के लोग मिलकर करते हैं.

सतयुगी रहस्यमयी केले के पेड़ का क्या है अनसुलझा रहस्य

आपको बता दें कि मां भगवती के दक्षिणी-पश्चिमी दिशा में चुटुबाग पर्वत पर मां भ्रामरी देवी की भी गुफाएं हैं. जहां किसी स्त्रोत से बूंद-बूंद पानी गिरता रहता है. इस रहस्य का खुलासा आजतक कोई नहीं कर पाया कि, आखिर ये पानी की बूंदे कहां से आती है. इसके साथ ही यहां से लगभग 70 फीट नीचे एक रहस्यमयी केले का पेड़ है. जिसका नाम सतयुगी वृक्ष है. जो हजारों साल पुराना है. जो इतना पुराना होने के बाद भी पूरी तरह से हरा-भरा है. इस केले के पेड़ में फल भी लगता है. इस पेड़ के पास एक हैरान करनेवाला पत्थर भी है. जिसके अंदर से तेज धार में सालों भर पानी निकलता रहता है. लेकिन ये पानी केवल केले के पेड़ को ही मिलता है. इसके आलावा बाकी सभी स्थान पर सूखा ही रहता हैं. इस मंदिर में कई हजार साल पहले चकला राज्य के राजा की ओर से चारदीवारी बनवाई गई थी. जिसमें सात दरवाजे भी थे.

आज भी कायम है हजारों साल पुरानी परंपरा

आज हजारों साल बीत जाने के बाद भी मां उग्रतारा नगर मंदिर में राज दरबार की परंपरा का पालन होता है. इस परंपरा के आधार पर यहां आज भी पुजारी के रूप में मिश्रा और पाठक परिवार ही माता की पूजा-अर्चना करते हैं. इसके आलावा बकरे की बलि पुरुषोत्तम पाहन ही देते हैं. काड़ा की बलि प्रसाद नायक लोग तो मंदिर में नगाड़ा बजाने के लिए नटवा घांसी आते हैं. वहीं दूध लाने लिए सोरठ नायक, भोग बनाने के लिए चंदू नायक और टाटी लाने के लिए बुधन तुरी को नियुक्त किया गया हैं.

क्या है चार लाल झंडों के साथ एक सफेद झंडा गाड़ने का रहस्य

मां उग्रतारा नगर मंदिर के पश्चिमी हिस्से में मादागिर पर्वत पर मदार साहब का मजार भी है. लोगों का कहना है कि मदार साहब माता के बहुत बड़े भक्त हुआ करते थे. 3 सालों पर 1 बार इनकी भी पूजा होती है, और इसके साथ ही काड़ा की बलि देने की भी परंपरा है. फिर उसके खाल से माता उग्रतारा के लिए नगाड़ा बनाया जाता है. जिसको बजाकर आरती की जाती है. मान्यता है कि जब कोई मन्नत मांगता है, और वो पूरी हो जाती है. तो मंदिर में पांच झंडे गाड़ने पड़ते है. जिसमें 4 लाल झंडा माता के लिए तो वहीं एक सफेद झंडा मदार साहब की मजार पर गाड़ा जाता है.

मां उग्रतारा नगर मंदिर पहुंचने का रास्ता

यदि आप भी मां उग्रतारा नगर मंदिर दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो  चंदवा तक ट्रेन या सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं. फिर चंदवा से मंदिर तक बस या अन्य निजी वाहन से मंदिर जा सकते हैं. रात के मंदिर 12:30 बजे तक बंद हो जाता है. फिर सुबह के 4:30 बजे मंदिर का पट खुलता है.

रिपोर्ट: प्रियंका कुमारी 

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