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“बटेंगे तो कटेंगे” क्या है इस नारा का मतलब? किससे नेता कर रहें आह्वान! जानें पूरा मामला

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 2:26:43 AM

रांची(RANCHI): चुनावी समर में सभी पार्टी अपने अपने नारे और वादे के साथ विधानसभा फतेह करने की तैयारी में है. झारखंड विधानसभा 2024 हर चुनाव से अलग है. प्रचार का तरीका हो या भाषण में इस्तेमाल शब्द सब बदल चुके है. अब के चुनाव में कोई झारखंड की अस्मिता बचाने वाला चुनाव बता रहा है तो कोई झारखंडी को बचाने वाला. ऐसे में जनता भी सोच में है कि आखिर झारखंड विधानसभा चुनाव में क्या हो रहा है. आखिर नेता के भाषणों का मतलब क्या है. एक ओर भाजपा नेता ‘बटोगे तो कटोगे’ का नारा बुलंद कर रहे है तो दूसरे ओर ‘जुड़ेंगे तो बचेंगे’ की आवाज सुनाई दे रही है. अगर देखें तो दोनों नारों का मतलब एक ही है.

सबसे पहले बात भाजपा की कर लेते है. झारखंड की सत्ता में आने को बेचैन भाजपा कई तरकीब अपना रही है. खुद पीएम मोदी और शाह ने अपने हाथ में झारखंड की कमान संभाल रखा है. इनके अलावा कई फायर ब्रांड नेता भी चुनावी सभा कर भाजपा के पक्ष में प्रचार कर रहे है. इसमें सबसे ज्यादा डिमांड योगी आदित्यनाथ की है. पब्लिक डिमांड को देखते हुए भाजपा ने भी योगी की कई सभा झारखंड में प्रस्तावित किया है. योगी आदित्यनाथ ने कई सभा भी कर लिया. जिसमें भाषण में बटोगे तो कटोगे का जिक्र किया है.

अब इसके मायने क्या है यह बड़ा सवाल है. अगर इसे सीधे सरल शब्दों में देखें तो इसका मतलब एक जुट हो कर वोट करने की अपील है. लेकिन तरीका थोड़ा अलग है, आम तौर पर देखें तो चुनाव के समय जाति के वोट अलग अलग बंट जाते है. हिन्दू वोट का बिखराव होता देख योगी ने इस नारे को बुलंद किया है. जिससे वोट का बिखराव ना हो और जाति के नाम पर वोट ना पड़े. इसके अलावा कटने का अर्थ किसी को मारना नही है. इसका मतलब चुनाव में कट जाओगे. सत्ता की डोर दूसरे दल के पास चली जाएगी. जिससे पांच साल इंतजार करना पड़ेगा.

इस ‘बंटोगे तो कटोगे’ के जवाब में कांग्रेस और अन्य दल ने ‘एक रहें नेक रहें, जुड़ेंगे तो जीतेंगे’ लेकर आई है. इसका भी अर्थ देखें तो एक ही है. बस यह थोड़ा अलग तरीके से पेश किया गया है. भाजपा बटने पर बोल रही है कांग्रेस इसे घूमा कर जुड़ेंगे तो जीतेंगे बता रही है. अगर देखें तो कांग्रेस का एक बड़ा तबका वोट बैंक है. जो कभी किसी दूसरे दल में नहीं जाता है. यह किसी से छुपा नहीं है, लेकिन हिन्दू धर्म में वोट का बिखराव होता है. सभी अपने आजादी और पसंद के हिसाब से वोट करते है. जिसे अब भाजपा मुद्दा बना कर चुनाव में नैया पार करने की कोशिश में है.

 

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