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नगर निकाय चुनाव: नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम में क्या है अंतर, नए गाइडलाइंस ने उम्मीदवारों की क्यों बढ़ाई मुसीबत, जानिए डिटेल में   

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 11:23:35 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा कभी भी हो सकती है. बताया जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. पिछले दिनों ही इसके लिए आरक्षण रोस्टर जारी किये गए थे. वहीं इस बार नगर निकाय चुनाव को लेकर नियमों में भी कुछ बदलाव किये गए हैं. इन सबके बीच प्रत्याशी भी चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. कई प्रत्याशियों ने अपने चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी. बता दें कि राज्य में नगर निकाय तीन स्तरों पर विभाजित होते हैं. ये तीन स्तर नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद तथा नगर निगम हैं.

नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम में अंतर  

नगर पंचायत 

नगर निकाय की सबसे छोटी श्रेणी को नगर पंचायत कहते हैं. ये शहर की सरकार की सबसे छोटी इकाई होती हैं. ये वैसे क्षेत्र होते हैं, जो पहले गांव थे, लेकिन बाद में शहर में बदले हैं. इनकी जनसंख्या 30 हजार से एक लाख के बीच होती है. झारखंड में 19 नगर पंचायत हैं.  

नगर पालिका परिषद

शहरी इकाई की माध्यम इकाई को नगर पालिका परिषद कहते हैं. ये नगर पंचायत से बड़ी होती है और नगर निगम से छोटी होती है. ऐसे क्षेत्रों की जनसंख्या एक लाख से पांच लाख के बीच होती है. झारखंड में 20 नगर पालिका परिषद हैं.

नगर निगम

शहरी स्थानीय शासन की सबसे बड़ी इकाई नगर निगम होती है. पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रो में नगर निगम स्थापित किये जाते हैं. राज्य में नौ नगर निगम है.

झारखंड में 48 नगर निकाय हैं

9 नगर निगम

रांची, आदित्यपुर, चास, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, मानगो और मेदिनीनगर

20 नगर परिषद

बिश्रामपुर, चाईबासा, चक्रधरपुर, चतरा, चिरकुंडा, दुमका, गढ़वा, गोड्‌डा, गुमला, झुमरीतिलैया, जुगसलाई, कपाली नगर, लोहरदगा, मधुपुर, मिहिजाम, पाकुड़, फुसरो, रामगढ़, साहिबगंज और सिमडेगा

19 नगर पंचायत

बड़की सरैया, बरहरवा, बासुकीनाथ, बुंडू, चाकुलिया, छतरपुर, धनवार, डोमचांच, हरिहरगंज, हुसैनाबाद, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, महगामा, मझाआंव, नगर उंटारी, राजमहल और सरायकेला

नगर निकाय को लेकर नए दिशा-निर्देश

नगर निकाय चुनाव को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी किये गए हैं. इसके मुताबिक जो मुख्य बातें हैं, वो आपको हम बताने वाले हैं.

  1. अगर, किसी व्यक्ति पर नगर निगम या नगर पालिका का कोई भी बकाया है तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है. निकाय चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए वर्ष 2021-22 तक के सभी कर, शुल्क या दंड का भुगतान करना अनिवार्य होगा. अगर किसी को चुना लड़ना है तो इस अवधि के सभी बकाया का भुगतान करने के बाद ही वह नगर निकाय चुनाव लड़ने के योग्य बन पाएगा.
  2. आयोग के अनुसार, सभी बकाया के भुगतान को लेकर उम्मीदवार को एक स्वघोषणा पत्र भी जारी करना होगा. अगर, कोई उम्मीदवार स्वघोषणा पत्र जारी नहीं करता तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा.
  3. नगर निकाय चुनाव से जुड़े अधिनियम में प्रावधान है कि दो से अधिक संतान वाला व्यक्ति नगर निकाय के किसी भी पद का चुनाव नहीं लड़ सकता है, वह इसके लिए अयोग्य होगा. लेकिन, अगर किसी उम्मीदवार के दो से अधिक संतान अधिनियम लागू होने की तिथि यानि कि 9 फरवरी 2013 तक या उसके पहले से हैं और बाद में उनके कोई संतान नहीं हुए तो वह चुनाव लड़ सकते. आयोग ने इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया है कि संतानों की संख्या में गोद लिए गए संतान और जुड़वा संतानों को भी शामिल किया जाएगा. इस बारे में उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ निर्धारित प्रपत्र में स्वघोषणा पत्र देना होगा.



 

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