धनबाद (DHANBAD): धनबाद स्टेशन पर कई बार गांजा के बड़ी-बड़ी खेप पकड़ी गई, लेकिन यह खुलासा नहीं हुआ कि गांजा के अंतर प्रांतीय तस्करी में कितना बड़ा गैंग शामिल है. जब भी पकड़ में आते हैं, कोरियर ही पकड़ में आते हैं. असली मुजरिम पकड़ से बाहर रहता है. यह भी एक सवाल है कि गांजा की तस्करी का धनबाद से क्या संबंध है? ओडिशा से बंगाल होते हुए गांजा धनबाद पहुंचता है और फिर पकड़ में आ जाता है. मतलब क्या धनबाद में भी गांजा तस्करी का कोई गिरोह काम करता है. जब गिरोह में कोई अनबन होती है, तो इसकी सूचना लीक कर दी जाती है और गांजा की बड़ी खेप पकड़ में आ जाती है.
जब-जब गांजा पकड़ा गया है, ओडिशा से ही इसकी सप्लाई हुई
जब-जब गांजा पकड़ा गया है, ओडिशा से ही इसकी सप्लाई हुई है और इसे बिहार अथवा उत्तर प्रदेश में ले जाना होता है. यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि ओडिशा से चलकर गांजा धनबाद पहुंच जाता है और तब जाकर खेप की बरामदगी होती है. जानकारी के अनुसार आरपीएफ और रेल पुलिस की टीम ने शनिवार की सुबह धनबाद स्टेशन से गांजा की एक बड़ी खेप बरामद की है. गांजा ले जाने वाले बिहार के बताए जाते है. एक ट्रॉली बैग में भरकर गांजा ले जाया जा रहा था. वह ओडिशा से गांजा की खेप लेकर धनबाद स्टेशन पहुंचे थे. उन्हें खेप को लेकर डेहरी ऑन सोन जाना था. गांजे की कीमत 16 लख रुपए से अधिक बताई गई है और इसका वजन 33 किलोग्राम बताया जा रहा है.
मां और बेटे को खेप पहुंचाने की मिली थी जिम्मेवारी
जानकारी के अनुसार एक महिला और एक पुरुष गांजा लेकर एलेप्पी एक्सप्रेस से धनबाद पहुंचे थे. इसकी सूचना पहले से ही आरपीएफ की टीम को थी. ट्रेन के धनबाद पहुंचते ही प्लेटफार्म नंबर 6-7 और 8 पर तलाशी अभियान शुरू की गई. मुखबिर की ओर से बताए गए महिला के चेहरे को टीम के सदस्य ने पहचान लिया. फिर उसे पकड़ा गया. उसके साथ उसका बेटा भी था. मां और बेटे के पास एक ट्रॉली बैग था. बैग की तलाशी लेने पर उसमें गांजा मिला. पूछताछ में बताया कि ओडिशा के संबलपुर से वह दोनों गांजा लेकर चले थे. उन्हें डेहरी ऑन सोन में किसी अनजान व्यक्ति को डिलीवरी देनी थी. उन लोगों ने यह भी बताया कि एक गांजा तस्कर उन लोगों के साथ ही धनबाद पंहुचा था. लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही वह निकल भगा. दोनों के पास से कुछ नगदी भी बरामद किया गया है.