धनबाद (DHANBAD): एक आंकड़े के अनुसार देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में हर एक साल 14,000 से अधिक कर्मी रिटायर हो रहे है. दूसरी तरफ कोल इंडिया में कार्यरत कर्मियों से रिटायर्ड कर्मियों की संख्या दोगुनी से भी अधिक पहुंच गई है. सूत्रों के अनुसार कोल इंडिया में कार्यरत कर्मियों की संख्या 2.10 लाख के करीब है, जबकि रिटायर्ड कर्मियों की संख्या 5 लाख के करीब पहुंच गई है. ऐसे में Contributary Post Retirement Medicare Scheme पर बोझ बढ़ गया है.
मजदूर संगठन क्यों मांग रहे फंड की मजबूती
अब मजदूर संगठन मांग कर रहे हैं कि इस स्कीम को और मजबूत किया जाए. उनकी मांग है कि मैनेजमेंट इस कोष में बड़ी राशि दे, जिससे रिटायर्ड कर्मियों की मेडिकल सुविधा में किसी तरह की परेशानी नहीं हो. बताया जाता है कि वर्ष 2015 में कोल इंडिया ने इसे लागू किया था. उसे समय रिटायर्ड होने वाले कर्मियों की संख्या लगभग चार लाख थी. उन्हें मेडिकल सुविधा देने का नियम बनाया गया था. इसके लिए रिटायर्ड कर्मियों को इस योजना में 20,000 रुपए एक मुश्त देना पड़ता था. आंकड़े के मुताबिक उस समय लगभग 3,000 कर्मी ही सदस्य थे.
2017 में योजना की समीक्षा के बाद हुआ क्या बदलाव
2017 में इसे रिवाइज किया गया, फिर रिटायर होने वाले कर्मियों को इस स्कीम में ₹40,000 जमा करने के बाद उन्हें 8 लाख चिकित्सा सुविधा देने का प्रावधान किया गया. यानी पति को चार लाख और पत्नी को चार लाख की सुविधा का नियम बनाया गया. संख्या अधिक होने से फंड पर भी लगातार बोझ बढ़ रहा है. इधर, कोल इंडिया लिमिटेड ने कई प्रावधानों में लगातार बदलाव किया है. अभी अनुकंपा पर नौकरी के मामले में कुछ राहत दी है. बताया गया है कि अब अनुकंपा पर नौकरी लेने वाले यह साल के बजाय 3 साल तक आवेदन कर सकते हैं. खैर, मेडिकल सुविधा को लेकर रिटायर्ड कर्मियों में फिलहाल कई तरह की बातें उठ रही है. मजदूर संगठन तो कोयला मजदूरों के लिए भी यह सुविधा की मांग उठा दी है.