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चर्चित विधायक सरयू राय ने एक बार फिर क्या कह बन्ना गुप्ता को घेरा है ,पढ़िए इस रिपोर्ट में !!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 7:48:29 PM

धनबाद(DHANBAD) : झारखंड के चर्चित विधायक सरयू राय और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना  गुप्ता में 36 का आंकड़ा जग जाहिर है. कई मौकों पर यह दिखता रहा है. बन्ना गुप्ता कहते हैं कि सरयू  राय को मेरे नाम का फोबिया  हो गया है. कुछ भी होता है तो मेरा नाम जोड़ दिया जाता है. दरअसल, आहार पत्रिका  को लेकर सरयू राय के खिलाफ हुई एफआईआर के बाद राजनीतिक लड़ाई अधिक बढ़ गई है. हालांकि, सरयू  राय ने चुनौती दी है कि मुझ पर लगाए गए आरोपों को कोई तो साबित करे. जो भी हो लेकिन जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट को लेकर जिस तरह से राजनीति गर्म है, उसी  तरह से सरयू राय और बन्ना गुप्ता के रिश्तों को लेकर भी इलाके में गर्माहट देखी जा रही ही. 

प्रधान सचिव को लिखा है पत्र 

इधर ,सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को एक बार फिर घेरा है. स्वास्थ्य विभाग, झारखण्ड सरकार के प्रधान सचिव से मांग की है कि वह राज्य सरकार के कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए निविदा से चयनित बीमा कंपनी को शीघ्र कार्यादेश देना सुनिश्चित कराये. राज्य सरकार के कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाली संचिका मंत्री के यहां दो महीना से लंबित है. जबकि निविदा में प्रीमियम की न्यूनतम दर वाली बीमा कंपनी को उसके चयन का पत्र दे दिया गया है. निविदा समिति ने उसके चयन की मंज़ूरी दे दी है. वित्त विभाग और विधि विभाग की सहमति इसपर मिल गई है. परन्तु बीमा कंपनी को कार्यादेश जारी करने के बदले संचिका स्वास्थ्य मंत्री के पास चली गई है और दो महीना से उनके यहां पड़ी हुई है. 

संचिका मंत्री के पास जाने और लंबित रहने के क्या कारण  हो सकते 
 
निविदा समिति के निर्णय के बाद संचिका मंत्री के पास जाने और लंबित रहने का कारण क्या हो सकता है? क्या मंत्री ने संचिका माँगा है? वित्त और विधि विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद निविदा की संचिका मंत्री के पास लंबित रहने का क्या तुक है ?इसके पहले भी 2023 में निविदा निकली थी. तीन सरकारी बीमा कंपनियों ने निविदा में भाग लिया था. एक तकनीकी दृष्टि से अयोग्य हो गई तो बाक़ी दो में जिसकी दर न्यूनतम थी, उसे कार्यादे़श देने के बदले निविदा ही रद्द कर दी गई. इस बार निविदा समिति, वित्त विभाग और विधि विभाग की सहमति के बावजूद बीमा कंपनी के चयन की संचिका स्वास्थ्य मंत्री के यहां लटकी हुई है. क्या स्वास्थ्य मंत्री के यहां निविदा दर पर मोल भाव हो रहा है ? रेट निगोसिएशन हो रहा है ? अख़बार में स्वास्थ्य मंत्री का बयान है कि तकनीकी अड़चनों को दूर किया जा रहा है. 

सरयू राय के सवाल -कौन सी अड़चन दूर करना चाहते है मंत्री 

निविदा समिति, विधि विभाग की स्वीकृति के बाद कौन सी ऐसी तकनीकी अड़चन है, जिसे मंत्री दो महीना से दूर कर रहे है. यह अड़चन तकनीकी है या वित्तीय है, इसका खुलासा होना चाहिए. मंत्री के स्तर पर न्यूनतम दर वाली कंपनी से निगोसिएशन होता है तो इसकी ज़िम्मेदारी से सचिव समेत अन्य अधिकारी नहीं बच सकते है. बीमा कंपनी यदि कोई अवैधानिक दर वार्ता में लगी है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव न केवल कंपनी की साख पर पड़ेगा, बल्कि इससे राज्य सरकार के कर्मचारियों की चिकित्सा सुविधा की गुणवता भी प्रभावित होगी. राज्य सरकार को करोड़ों का हो रहा नुक़सान अलग है. उन्होंने स्वास्थ्य सचिव से आग्रह किया है कि  वह  मंत्री के यहां से शीघ्र संचिका मंगाए और निविदा समिति का निर्णय लागू कराये.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DhanbadJamshedpurSaryu RayBanna GuptaRelation

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