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अगले कुछ सालों में 2.40 करोड़ रेल यात्रियों को कन्फर्म टिकट देने की क्या है तैयारी, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 10:29:00 PM

धनबाद(DHANBAD) : सब कुछ अगर ठीक-ठाक रहा तो रेलवे से अगले कुछ वर्षों में वेटिंग टिकट इतिहास की बात हो जाएगी. भीड़ भाड़ वाली ट्रेनों के पीछे-पीछे अलग ट्रेन चलेगी. इस बात में कोई विवाद नहीं है कि भारतीय रेल देश की "लाइफ लाइन" है. अमूमन प्रतिदिन 2.40 करोड़ लोग ट्रेन से यात्रा करते है. देश में ट्रेनों की कुल संख्या 22,593 है. जिसमें 13,452 यात्री ट्रेनें हैं, जबकि 9,141 मालगाड़ी ट्रेन चलती है. रेलवे ने जो काम शुरू किया है, उसके अनुसार वेटिंग टिकट धीरे-धीरे खत्म होते जाएंगे. ट्रेनों में रिजर्व सीटों की डिमांड और सप्लाई के अंतर को कम करने की दिशा में काम शुरू हो गया है. पहले चरण का काम इसी साल दिसंबर से शुरू हो सकता है. इसके लिए पांच लाइनों पर 500 किलोमीटर दूरी के लिए सामान्य ट्रेनों में कंफर्म टिकट की सुविधा 90% तक कर लिए जाने की योजना है. इसका विवरण लोगों तक पहुंचाने के लिए भी रेलवे ने व्यवस्था करने की ओर कदम बढ़ाया है. बताया जाता है कि रेलवे के सुपर ऐप से लोगों को यह जानकारी मिलेगी. हालांकि डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर अधिक है. 

वेटिंग को खत्म करने में लग सकता है समय 
 
पूरी तरह से इसे खत्म करने के लिए 6 से 7 साल का वक्त लग सकता है. लेकिन इस अवधि के बाद वेटिंग टिकट इतिहास की बात हो जाएगी. सूत्रों के अनुसार पांच चुनिंदा मार्ग पर 500 किलोमीटर की दूरी के लिए वेटिंग और कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों का डाटा जुगाड़ कर लिया गया है. इसे पता चलेगा कि किस रूट पर रोज कितने यात्री किस श्रेणी का आरक्षित टिकट लेते है. भले ही यह टिकट कंफर्म हो या वेटिंग. रेलवे सुपर ऐप पर भी काम शुरू कर दिया है और अगले 6 महीने में यह काम करने लगेगा. यात्री जैसे ही चुनिंदा रूट पर यात्रा की शुरुआती और अंतिम स्टेशन का विवरण डालेंगे, उन्हें ट्रेनों के कंफर्म टिकट का डाटा दिखने लगेगा. बात इतनी ही नहीं है, कई चिन्हित भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में कंफर्म सीट के लिए एक घंटे के अंतराल पर दूसरी ट्रेन चलाने की भी योजना है. जिसे लोगों को कंफर्म टिकट मिलेगा. ट्रेन में अतिरिक्त बोगी जोड़कर भी कंफर्म टिकट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी. 

धनबाद को मिले है "त्रिशूल" और "ब्रह्मास्त्र"
 
रेलवे यात्री सुविधाओं के लिए काम करना शुरू कर दिया है तो मालगाड़ियों को भी कम खर्च में चलाने की योजना भी अस्तित्व में आ गई है. धनबाद रेल मंडल को"त्रिशूल" और "ब्रह्मास्त्र" मिल गए है. "त्रिशूल" में  तीन माल गाड़ियों को जोड़कर एक ट्रेन चलाई जा रही है. "ब्रह्मास्त्र" में चार मालगाड़ियों को जोड़कर एक ट्रेन बनाया जा रहा है. धनबाद रेल मंडल चुंकि देश में राजस्व उगाही में नंबर एक मंडल है. धनबाद से कोयले की ढुलाई अधिक होती है. इसलिए धनबाद को यह सुविधा मिली है और अब रेलवे वेटिंग टिकट सिस्टम को भी इतिहास बनाने की ओर काम करना शुरू कर दिया है. अभी तक के आंकड़े के मुताबिक पश्चिम बंगाल का हावड़ा रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है. यहां सबसे अधिक कुल 23 प्लेटफार्म है. इन प्लेटफार्म से प्रतिदिन 10 लाख लोग ट्रेन से सफर करते है. इसलिए तो रेलवे को देश का "लाइफ लाइन" कहा जाता है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadRailwayArrangementsFacilityWorking

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