धनबाद(DHANBAD): झारखंड भाजपा में आदिवासी नेता और ओबीसी नेताओं की बड़ी फ़ौज है. अब सवाल उठ रहे है कि तो क्या भाजपा के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र राय को हाशिये पर धकेल दिया गया है? क्या झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी प्रदेश अध्यक्ष के पद से पत्ता कट गया है? क्या सांसद मनीष जायसवाल प्रदेश अध्यक्ष की रेस से बाहर हो गए हैं? क्या वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की सहमति से आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है? क्या आदित्य साहू ही अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे? क्या संगठन में गतिशीलता लाने के लिए आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है? आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सोशल मीडिया पर जिस तरह से जिला स्तर के नेता, उनके साथ अपना फोटो शेयर कर रहे हैं, उससे भी यह संदेश निकलता है कि आदित्य साहू ही प्रदेश अध्यक्ष हो सकते है .
सबको क्यों है राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा का इंतजार
हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के बाद ही अब झारखंड प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा संभव है. वैसे भी भाजपा ने ओबीसी कार्ड खेल कर अपनी मनसा बता दी है कि झारखंड में अब वह किस तरह की राजनीति करना चाहती है. वैसे सूत्र बताते हैं कि भाजपा आलाकमान ने झारखंड में भाजपा के भविष्य को लेकर सर्वे भी कराया है. कुछ रुपरेखा भी तय की है. इस सर्वे में पार्टी को राहत मिलती नहीं दिख रही है. वैसे भी झारखंड में संगठन का काम धीमा चल रहा है. प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में भी है. रघुवर दास जब ओडिशा के राज्यपाल से इस्तीफा देकर झारखंड की राजनीति में फिर से शामिल हुए थे, तो अंदाज लगाया जा रहा था कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. लेकिन अब इसकी संभावना कमती दिख रही है .
विधान सभा चुनाव के ठीक पहले रविंद्र राय को मिला था पद
वैसे रविंद्र राय को चुनाव के ठीक पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. चर्चा थी कि वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं और वह विधानसभा के चुनाव लड़ सकते है. ऐसे में पार्टी ने एक पद देकर उन्हें मनाने की कोशिश की थी. वैसे तो कोडरमा लोकसभा सीट से टिकट कटने के बाद से ही रविंद्र राय भीतरी- भीतर नाराज चल रहे है. कार्यभार ग्रहण करने के बाद आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में डबल इंजन की सरकार बनाना उनका सपना है. इसके लिए वह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रीयो , वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे. इसका भी मतलब निकला जा रहा है. आदित्य साहू रांची से लगातार की कई दफा सांसद रहे रामटहल चौधरी के सहयोगी के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत की, तब वे रामटहल चौधरी के सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे. बिहार चुनाव के ठीक पहले इस बदलाव के कई माने -मतलब निकाले जा रहे है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
