धनबाद(DHANBAD): वाह रे -बिहार के धनकुबेर इंजीनियर साहब! अब उनकी विदेश में संपत्ति की जांच के लिए बिहार की एजेंसी द्वारा इंटरपोल डेस्क से मदद मांगने की सूचना है. बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक की देश से बाहर नेपाल में संपत्ति का खुलासा हुआ है. बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने इंटरपोल डेस्क से जांच में मदद मांगी है. बता दे कि पिछले सप्ताह ही बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने अभियंता मनोज कुमार रजक के ठिकानों को खंगाला था. दर्जनों अचल संपत्ति की जानकारी मिली थी.
17 मार्च को हुई छापेमारी में हुए थे बड़े -बड़े खुलासे
इसी छापे में नेपाल के काठमांडू और सुनसरी में अचल संपत्तियों का पता चला था. यह अलग बात है कि 2009 में मनोज कुमार रजक नौकरी पाए थे. आर्थिक अपराध इकाई ने छापामारी करने के बाद उनके स्थापना से लेकर अब तक तक की कुंडली खंगाल रही है. उल्लेखनीय है कि 17 मार्च को आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मनोज कुमार रजक के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. छापेमारी में केवल बिहार, पश्चिम बंगाल ही नहीं, नेपाल में भी संपत्ति का खुलासा हुआ था. गैस एजेंसी का भी पता चला था. दार्जिलिंग में पार्टनरशिप में चाय बागान की भी जानकारी मिली थी.
आखिर केवल 17 साल में कैसे बन गए इतने बड़े धनकुबेर
केवल 17 साल की नौकरी में वह "धनकुबेर" कैसे बन गए. 2009 में उन्होंने बिहार ऊर्जा विभाग में असिस्टेंट इंजीनियरिंग के तौर पर नौकरी शुरू की और देखते-देखते धनकुबेर बन गए. अब उन पर जांच का शिकंजा कस गया है, देखना है आगे आगे होता है क्या?सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ठीक नहीं थी. शिक्षा ऋण लेकर उन्होंने पढ़ाई पूरी की थी. लेकिन बाद में राशि लौटाने में भी उनको परेशानी हुई. लेकिन 2009 में नौकरी पाने के बाद पता नहीं उन्होंने क्या किया, कैसे किया, की लक्ष्मी उनके आगे पीछे मंडराने लगी. लेकिन अब सब कुछ बताना होगा। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या उनके किसी निर्णय से विभाग को नुकसान हुआ और ठेकेदारों को फायदा हुआ? जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी "प्याज के छिलके" की भांति खुलासे होते जाएंगे।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो