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80 के दशक में वासेपुर ऐसा नहीं था,अभी तो मामा -भगिना का परिवार ही बन बैठा है दुश्मन 

80 के दशक में वासेपुर ऐसा नहीं था,अभी तो मामा -भगिना का परिवार ही बन बैठा है दुश्मन 

धनबाद(DHANBAD):  80 के दशक में धनबाद का वासेपुर ऐसा नहीं था. वासेपुर के लोग आपस में गोलबंद  थे, पढ़े- लिखे लोग उस समय भी थे और बाद में भी हुए. इसी तरह नया बाजार का भी यही हाल था. लेकिन आपसी रंजिश वासेपुर और नया बाजार के बीच उस समय खूब चलता था. इसी रंजिश के क्रम में 1983 में फहीम खान के पिता सफीक खान की बरवअड्डा  में हत्या कर दी गई थी. उसके बाद से तो यह सिलसिला चल निकला और अभी भी चल रहा है. पहले वासेपुर की अगुवाई करने वाला फहीम खान का परिवार एकजुट था लेकिन फिलहाल परिवार ही आपस में लड़ रहा है. प्रिंस खान तो  फहीम खान का भगिना  है. अभी फहीम खान और प्रिंस खान के परिवार  में ही अदावत छिड़ी  हुई है. दोनों परिवार एक दूसरे के जान के दुश्मन बने हुए है. वैसे ,1983 में सफीक खान की हत्या के बाद तो हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब भी जारी है. गैंगवार  का स्वरूप बदल गया है, अब रंगदारी वसूली के लिए वासेपुर के लोग आपस में ही लड़- भिड़  रहे है. नया बाजार का इलाका फिलहाल शांत है. धनबाद के इस वासेपुर पर फिल्म भी बनी. फिल्म बनने के बाद पूरे देश में वासेपुर का नाम चर्चित हो गया. 80  के  दशक से यहां गैंग चलता है. 

गैंगवार कभी किसी के साथ तो कभी किसी के साथ चलता रहा 

यह अलग बात है कि गैंग की लड़ाई कभी किसी के साथ तो कभी किसी के साथ होती रही है. गैंगवार  में कितने लोगों की जान गई, इतना खून बहने के बाद भी गैंगवार  शिथिल नहीं पड़ा है. किरदार जरूर बदल गए हैं. गैंगवार की शुरुआत 1983 में हुई ,जब फहीम खान के पिता सफीक  खान की बरवाअड्डा  में हत्या कर दी गई थी. उसके बाद से तो यह सिलसिला  चल ही रहा है. सफीक  खान की हत्या के बाद 1984 में नया बाजार में असगर की हत्या कर दी गई. फिर 1985 में अंजार की जान गई. फहीम खान के भाई समीम खान की 1989 में धनबाद कोर्ट परिसर में बम मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद फहीम खान के  एक और भाई छोटन खान की 1989 में नया बाजार रेलवे लाइन पर हत्या कर दी गई थी. यह सब यहीं नहीं थमा बल्कि 1998 में हिल कॉलोनी मजार के पास मोहम्मद नजीर और महबूब की हत्या कर दी गई. इसके बाद 2000 में घर में घुसकर जफर अली की जान ले ली गई.

2001 में फहीम की मां और मौसी की हत्या की गई 

डायमंड क्रॉसिंग के पास 2001 में फहीम की मां और मौसी की जान गई थी. उसके बाद 2009 में रांची में  वाहिद आलम की हत्या हो गई. 2011 में डीआरएम कार्यालय परिसर में इरफान खान को शूट  कर दिया गया. 2014 में फहीम खान के साला टुना खान की हत्या कर दी गई. 2017 में पप्पू पाचक  की हत्या हुई. 2021 में वासेपुर में लाला खान की जान ले ली गई. महताब आलम उर्फ़ नन्हे  की हत्या 2021  में हुई. गैंगवार में मारे गए लोगों की फेहरिस्त लंबी है. अभी तक यह गैंगवार फहीम खान और अन्य लोगों के बीच चलता था लेकिन अब फहीम खान के परिवार को उन्हीं के संबंधियों से चुनौती मिल रही है. फहीम  खान के बेटे पर भी अभी हाल के दिनों में हमला हुआ था.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Published at:07 Oct 2023 03:38 PM (IST)
Tags:dhanbadwasepurcrimegangnayabazar
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