रांची(RANCHI): चाईबासा जिले में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बल के जवान का अभियान तेज है. ऑपरेशन मेधा बुरु में 17 माओवादियों को एक साथ मुठभेड़ में मार गिराया. राज्य में नक्सल अभियान में यह बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. लेकिन इस पूरे मुठभेड़ पर अब माओवादी प्रवक्ता आजाद ने एक AUDIO रिलीज कर मुठभेड़ को फर्जी बताया है.
माओवादी प्रवक्ता ने अपने बयान में दावा किया कि 22 जनवरी 2026 को कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस ने सारंडा के बहुदा और कुमडीह गांव के जंगलों में उनके दस्ते पर अचानक हमला किया. प्रवक्ता के अनुसार, सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध फायरिंग की.
संगठन ने आरोप लगाया है कि यह कोई आम मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि जीपीएस ट्रैकर और खाद्य सामग्री में जहर मिलाने जैसी साजिशों के जरिए अंजाम दी गई एक हत्या' थी. इस ऑडियो बयान में माओवादियों ने स्वीकार किया है कि इस कार्रवाई में उनके संगठन को बड़ा नुकसान हुआ है. मारे गए संगठन ने 'लाल सलाम' कहकर श्रद्धांजलि दी है.
आदिवासियों में दहशत का माहौल
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से वनग्रामों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग गहरे खौफ में हैं. बिना किसी पूर्व सूचना के हुई भारी गोलीबारी और हवाई हमलों के कारण कई ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं. संगठन ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह जनता के अधिकारों का हनन है.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
माओवादी प्रवक्ता ने सुरक्षा बलों पर पुराने पैटर्न को दोहराने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोबरा बटालियन पहले भी इस तरह की फर्जी कार्रवाइयां कर चुकी है. बयान में कहा गया कि पुलिस सीधे लड़ने के बजाय राशन में जहर मिलाने और ट्रैकर्स का सहारा ले रही है. प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि उनके तीन साथी फिलहाल पुलिस की हिरासत में हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
जनता से समर्थन की अपील
बयान के अंत में माओवादी संगठन ने समाज के विभिन्न वर्गों मजदूरों, छात्रों, किसानों और बुद्धिजीवियों से इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने और विरोध दर्ज कराने की अपील की है. उन्होंने इसे एक कायरतापूर्ण और 'जघन्य अपराध बताया है. वहीं इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने भी जांच शुरू कर दी है. पुलिस मुख्यालय पूरे audio की सच्चाई की जांच कर रही है.
रिपोर्ट: संतोष वर्मा
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