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चांडिल में गैरकानूनी तरीके से कराई जा रही है बोटिंग, मछली पकड़ने वाले बोट का हो रहा है गलत इस्तेमाल, अनहोनी का कौन होगा जिम्मेदार?

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:54:50 AM

सरायकेला(SARAIKELA): झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू चांडिल डैम नौका विहार पहुंचे. जहां जिला प्रशासन के द्वारा मंत्री को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान मंत्री नोका बिहार में वोटिंग कर पर्यटन स्थल को देखा, और कहा कि चांडिल एक बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस है. यहां के पर्यटकों के लिए और बेहतर क्या किया जा सकता है. यहां दो प्रोजेक्ट हमारा चल रहा है. एक डैम के नीचे रिसोर्ट बनने जा रहा है, दूसरा डैम के अंदर आईलैंड बनाया जाएगा, साथ ही आईलैंड में इको कॉटेज बनाने का विचार है. बहुत जल्दी यह चीज धरातल पर उतरने का प्रयास करेंगे. नौका विहार की अगर बंदोबस्त नहीं हुई तो इस पर जिला के उपायुक्त ध्यान दें.

अनहोनी का कौन होगा जिम्मेदार?

आपको बताएं कि चांडिल डैम के नौका बिहार में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है यहां दूरदराज से आए लोग पिकनिक का आनंद लेते है, लेकिन यहां एक बड़ा सवाल यह है कि जलाशय में बोटिंग के दौरान अगर कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

चांडिल में गैरकानूनी तरह  से कराई जा रही है वोटिंग

चांडिल बांध विस्थापित मत्स्यजीवी स्वावलंबी सरकारी समिति द्वारा नौका बिहार का संचालन किया जा रहा है. यहां के संचालकों के खिलाफ कई सवाल उठ रहे हैं यहां के संचालक गैरकानूनी ढंग से बोटिंग चला रहे हैं और स्वर्णरेखा परियोजना चांडिल का बकाया 1 करोड़ 56 लाख नहीं देने के कारण विभाग ने सार्टिफिकेट केस सरायकेला में किया है.

मछली पकड़ने वाले वोट का हो रहा है गलत इस्तेमाल

इस मामले में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल उठता है. यहां के संचालकों के पास इसके लिए कोई मान्यता नहीं है. यहां के पर्यटकों को यह जानने का अधिकार है कि अगर कोई दुर्घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? नौका विहार में पर्यटक विभाग लगभग 60-70 लाख का इंजन बोट एवं मत्स्य विभाग सरायकेला द्वारा 40-50 लाख का बोट उपलब्ध कराया गया है. विस्थापितों की स्वरोजगार के लिए मत्स्य विभाग ने डैम में मछली पकड़ने के लिए मछुआरा को बोट उपलब्ध कराया है. जिसका ये लोग गलत इस्तेमाल कर व्यवसाय में लगाकर हर दिन लाखों रुपया कमा रहे हैं. मछली पकड़ने वाले बोट में सैलानियों को बोटिंग कराते है. इसमें ये समिति के लोग और विभाग की मिलीभगत है.


रिपोर्ट-वीरेंद्र मंडल

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