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महिला हिंसा ! विजय  झा के सुझाव पत्र को राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय को भेजा, पढ़िए क्या लिखा था पत्र में !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 7:49:01 PM

धनबाद(DHANBAD) : धनबाद के चर्चित समाजसेवी और पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा ने कोलकाता मेडिकल कॉलेज में घटित घटना के बाद एक पत्र, अपने सुझाव के साथ राष्ट्रपति को प्रेषित किया था. जिसमें कानून को और कठोर बनाए जाने के लिए 11 सूत्री सुझाव भी दिए गए थे. राष्ट्रपति ने उनके पत्र को संज्ञान में लेते हुए, सचिव भारत सरकार( गृह मंत्रालय) को भेज दिया है. इसकी सूचना राष्ट्रपति सचिवालय से विजय कुमार झा को दी गई है. पत्र में उन्होंने लिखा था कि आर जी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है. साथ ही  पूरे समाज को भी शर्मशार  कर दिया है.  पूरी दुनिया में भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश का सिर शर्म से झुक गया है. जिस देश के घर-घर में मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती की आराधना की जाती हो, उस देश में किसी महिला के साथ ऐसी बर्बरता की जाती है, तो यह तभी संभव होता है, जब अपराधियों के मन में देश में स्थापित कानून का खौफ नहीं हो.

वर्तमान कानून में और कठोर प्रावधान करने की जरुरत 

वक्त आ गया है कि जिस प्रकार निर्भया कांड के बाद ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कुछ कड़े कानून बनाए गए थे. उसी प्रकार आज भी वक्त की जरूरत है कि वर्तमान कानून में कुछ अतिरिक्त प्रावधान किए जाए. जिससे कि अपराध करने वाले और आपराधिक गिरोह पर कानून के प्रति खौफ  पैदा किया जा सके. जिससे और कोई भी कानून अपने हाथ में लेने की हिम्मत नहीं कर सके. उन्होंने अपने सुझाव में कहा था कि ऐसे सभी मुकदमों की जांच सीबीआई को दिया जाना चाहिए. ऐसे मुकदमों की जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित करने का समय 30 दिन सीमित किया जाना चाहिए. ऐसे सभी मुकदमों का निचली अदालत द्वारा 100 दिन के भीतर फैसला अनिवार्य किया जाना चाहिए.  निचली अदालत के द्वारा फैसला देने के बाद सिर्फ एक अपील का प्रावधान किया जाना चाहिए. 
 
ऐसे सभी मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन हो 

ऐसे सभी मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए.  ऐसे गठित स्पेशल कोर्ट में दिन-रात, रविवार के साथ-साथ सभी छुट्टियों के दिन भी सुनवाई की व्यवस्था होनी चाहिए. ऐसे यौन उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपी को फांसी से कम कोई भी सजा नहीं होनी चाहिए. ऐसे कांड में संलिप्त  व्यक्ति को माइनर के आधार पर कोई छूट भी नहीं मिलनी चाहिए. अभियुक्त जब तक जेल में रहे, तब तक एक दिन के लिए भी उसे किसी भी आधार पर पैरोल नहीं मिलनी चाहिए. सजा प्राप्त व्यक्ति को जेल के अंदर अलग सेल में बिल्कुल अकेला रखा जाना चाहिए. ऐसे मुकदमे में सजा प्राप्त व्यक्ति के सभी मौलिक अधिकार, कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकार को समाप्त किया जाना चाहिए. उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि 9 अगस्त को कोलकाता में घटना के बाद भी कई राज्यों में ऐसी घटनाएं हो चुकी है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadBijay JhaPatraRashtrapatiMahila hinsa

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