पलामू (PALAMU): रेड़मा निवासी विनीत तिवारी की निर्मम हत्या को लगभग आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनका परिवार अब भी न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है. इस बीच, महापौर अरुणा शंकर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरा दुख और आश्चर्य जताया. उन्होंने कहा कि यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज के प्रभावशाली नेताओं की खामोशी भी चिंता का विषय है. एक युवा की क्रूर हत्या से पूरा इलाका शोक में डूबा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि समाज के कई बड़े चेहरे अब तक खुलकर सामने नहीं आए हैं. जिन संगठनों और नेताओं पर समाज के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी होती है, वे इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़े नजर नहीं आ रहे हैं. यही वजह है कि लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस मामले पर इतनी चुप्पी क्यों है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की खामोशी से अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है और आम लोगों में असुरक्षा की भावना गहराती है. पलामू की राजनीति में ब्राह्मण समाज का प्रभाव माना जाता है और कई बड़े पदों पर इस समाज के नेता मौजूद हैं. इसके बावजूद, जब समाज के ही एक युवक की इतनी दर्दनाक हत्या हुई, तो सार्वजनिक प्रतिक्रिया का अभाव लोगों को खटक रहा है. सोशल मीडिया और आम चर्चाओं में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह चुप्पी किसी राजनीतिक कारण से है या फिर सत्ता के समीकरणों को साधने की कोशिश. पीड़ित परिवार, खासकर बुजुर्ग पिता और अन्य सदस्य, न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है.
रेड़मा की गलियों में आज भी इस घटना की गूंज सुनाई देती है. परिजनों का दुख और आक्रोश साफ नजर आता है, लेकिन बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया अब भी नदारद है. प्रशासन अपनी ओर से जांच की बात कर रहा है, पर लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में सामाजिक और राजनीतिक दबाव भी जरूरी होता है ताकि न्याय प्रक्रिया तेज हो सके. यदि आने वाले दिनों में समाज के जिम्मेदार लोग अपनी चुप्पी नहीं तोड़ते, तो यह संदेश जाएगा कि वे केवल अवसर आने पर ही सक्रिय होते हैं. यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता और संवेदनशीलता की भी परीक्षा है. अब देखना यह है कि न्याय की इस लड़ाई में कौन खुलकर सामने आता है और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होता है.