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बाबा मंदिर में स्थापित है वीणाधर महादेव, यहां विधिवत पूजा अर्चना करने से पूरी होती है ये मनोकामना 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 3:52:42 AM

देवघर (DEOGHAR):  भगवान शंकर की तस्वीर, प्रतिमा या मूर्ति में आपको भोलेनाथ अपने सपरिवार के साथ और सभी की सवारी, त्रिशूल, नाग इत्यादि वाली मिलती है या देखी जा सकती है. लेकिन कभी भोलेनाथ को वीणा बजाते हुए आपने देखा है. अगर देखना चाहते है तो आइए बाबाधाम देवघर. यहाँ आपको ऐसा शिव का विग्रह है जो कहीं और आपको नहीं मिलेगा.

दुर्लभ है वीणाधर महादेव का विग्रह

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम अपने आप में कई इतिहास को संजोए हुए है. यह पवित्र तीर्थ स्थल सतयुग और त्रेतायुग दोनों युग का प्रतीक माना जाता है. सतयुग में माता सती का हृदय गिरा था और उसी स्थान पर त्रेतायुग में ज्योर्तिलिंग स्थापित की गई थी. वैसे तो बाबा मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा 22 मंदिर है. इसी में से पार्वती मंदिर के बगल में स्थित है वीणाधर महादेव. जहां महादेव का वीणा बजाते हुए दुर्लभ विग्रह स्थापित है.

 महादेव स्वर और सुर के स्वामी 

बाबाधाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पंडित दुर्लभ मिश्रा के अनुसार महादेव स्वर और सुर के स्वामी है. संगीत के अधिष्ठात्री है. स्वर का सातों सुर वीणा के सात तार से निकलता है. इस मंदिर में महादेव वीणा बजाते दिख रहे है इसलिए इनका नाम वीणाधर पड़ा है. इस मंदिर में संगीत, स्वर, सुर, वैदिक सभी का मिश्रण है. दुर्लभ मिश्रा के अनुसार ऐसा मूर्ति हिंदुस्तान में कही नहीं मिलेगा.

बौद्धकाल से जोड़ा जा रहा है विग्रह को

वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पंडित दुर्लभ मिश्रा की माने तो जो संगीत के प्रेमी है वह जानते है कि महादेव ही स्वर, सुर के स्वामी और संगीत के अधिष्ठात्री है. जानकर बताते है कि वीणाधर महादेव का विग्रह बौद्धकालीन है जो बेशकीमती है. बौद्ध वीणाधर महादेव की रुचि से पूजा करते थे. बौद्ध लोग मानते थे कि यह स्वरूप बुद्ध के संगीत प्रेम के रूप की मूर्ति है. वीणाधार महादेव का विग्रह छोटा है. इनकी विधिवत पूजा अर्चना करने से संगीत में न सिर्फ मुकाम हासिल होगा बल्कि जिसका स्वर नहीं निकलता है वो बोल भी सकता है. यही कारण है कि जो जानते है वे इनकी पूजा अवश्य करते है. इन्ही सब विशेषताओं के कारण यह तीर्थ स्थल अन्य स्थलों से अलग अपनी पहचान रखता है.

रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 

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