✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

कोल्हान DIG से मिलकर चिरियाबेड़ा के आदिवासियों ने सुरक्षाबलों के खिलाफ हिंसा का लगाया आरोप, दर्ज कराई शिकायत

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 1:27:10 PM

चाईबासा(CHAIBASA): 11 नवंबर 2022 को चिरियाबेड़ा गांव (अंजेड़बेड़ा राजस्व गांव, सदर प्रखंड, पश्चिमी सिंहभूम) में सर्च अभियान के दौरान फिर से सुरक्षाबलों द्वारा निर्दोष आदिवासियों के साथ हिंसा की गयी. 15 जून 2020 को सुरक्षाबल जवानों ने सर्च अभियान के दौरान इसी गांव के आदिवासियों को डंडों, बैटन, राइफल के बट और बूटों से बेरहमी से पीटा था. इस स्थिति पर झारखंड जनाधिकार महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने कोल्हान डीआईजी से 6 दिसंबर को मिलकर कार्रवाई की मांग की और संलग्न मांग पत्र दिया.

बता दें कि 11 नवंबर 2022 को अभियान के दौरान गांव की कई महिलाओं समेत निर्दोष आदिवासियों की पिटाई की गयी थी, एक नाबालिक लड़की के साथ बलात्कार के उद्देश्य से छेड़खानी किया गया और घरों में रखे समान को तहस-नहस किया गया. वृद्धा विधवा नोनी कुई जोजो के घर में सुरक्षाबल के जवान घुस के सामान को बिखेर दिए. फिर घर के अन्दर उनकी नाबालिक बेटी शांति जोजो के हाथों को दो जवानों ने पकड़ा व तीसरा जवान उसे छुने लगा. उसे घीच के झाड़ी के तरफ ले जाना चाहता था. वो किसी तरह अपने को छुड़ाके भागी और मां से लिपट गयी. फिर जवानों ने नोनी कुई को डंडे से बुरी तरह पीटे लेकिन उसने बेटी को नहीं छोड़ा. शांति जोजो ने तथ्यान्वेषण दल को स्पष्ट बोला कि जवानों द्वारा किए गए छेड़खानी से उसको ऐसा लगा कि उसका बलात्कार करने वाले थे. अन्य कई लोगों के साथ हिंसा की गयी. सुरक्षाबलों ने कई के घरों में रखे सामान (धान, कपड़े, बर्तन आदि) और खलियान में रखे धान को तहस-नहस कर दिया. पूरी घटना के दौरान सुरक्षाबल के जवान हिंदी में पूछताछ कर रहे थे और ग्रामीण लगातार हो भाषा में बोल रहे थे कि उन्हें हिंदी अच्छे से नहीं आती है.

वहीं, प्रतिनिधिमंडल ने डीआईजी को यह भी याद दिलाया कि 15 जून 2020 को सुरक्षाबलों द्वारा किए गए हिंसा के विरुद्ध पीड़ितों ने कई बार विभिन्न स्तरों पर लिखित आवेदन दिया है लेकिन आज तक न दोषी सुरक्षाबलों के विरुद्ध कार्रवाई हुई और ना पीड़ितों को मुआवज़ा मिला. मामले में पीड़ितों का बयान दर्ज करवाने में जांच पदाधिकारी का रवैया नकारात्मक और उदासीन है.

अभियान के दौरान आदिवासियों के प्रति ऐसा अमानवीय व गैरकानूनी रवैया पूर्ण रूप से संविधान और लोकतंत्र विरोधी है. ऐसे गावों के ग्रामीणों की विशेष परिस्थिति व समस्याओं को समझने के बजाय सुरक्षाबलों द्वारा संवैधानिक, क़ानूनी व मानवता की सीमाओं को लांघ कर अभियान के नाम पर निर्दोषों पर व्यापक हिंसा की जाती है. यह भी देखने को मिल रहा है कि सारंडा क्षेत्र में ग्रामीणों के विरोध के बावज़ूद और बिना ग्राम सभा की सहमति के सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. यह पांचवी अनुसूची व पेसा कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. क्षेत्र के निर्दोष आदिवासी-मूलवासी-वंचितों को माओवादी घटनाओं में फ़र्ज़ी रूप से आरोपी बनाया जा रहा है.

महासभा ने डीआईजी से कहा कि उनसे अपेक्षा है कि इस मामले में कार्रवाई समेत वे कोल्हान में सुरक्षाबलों द्वारा संविधान व कानून का पूर्ण पालन के लिए उचित मार्गदर्शन देंगे. झारखंड जनाधिकार महासभा ने डीआईजी से निम्न बातें की.

  1. 11 नवंबर 2022 को चिरियाबेड़ा में लोगों पर हिंसा और नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी करने के दोषी सुरक्षाबल जवानों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज हो और न्यायसंगत कार्यवाई हो. इस प्रताड़ना के लिए पीड़ितों को मुआवज़ा दिया जाए.
  2. 15 जून 2020 को इस गांव के लोगों पर हुए हिंसा के लिए दोषी सुरक्षा बल के विरुद्ध न्यायसंगत कार्यवाई की जाए और पीड़ितों को मुआवज़ा दिया जाए.
  3. केवल संदेह के आधार पर अथवा केवल माओवादियों को महज़ खाना खिलाने के लिए निर्दोष आदिवासी-वंचितों को माओवादी घटनाओं के मामलों में न जोड़ा जाए. लोगों पर फ़र्ज़ी आरोपों पर मामला दर्ज करना पुर्णतः बंद हो.
  4. कोल्हान में नक्सल सर्च अभियानों की आड़ में सुरक्षाबलों द्वारा लोगों को परेशान न किया जाए और आदिवासियों पर हिंसा न किया जाए.
  5. कोल्हान (पांचवी अनुसूची क्षेत्र) में किसी भी गांव के सीमाना में सर्च अभियान चलाने से पहले ग्राम सभा व पारंपरिक ग्राम प्रधानों की सहमती ली जाए. स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों को आदिवासी भाषा, रीति-रिवाज, संस्कृति और उनके जीवन-मूल्यों के बारे में प्रशिक्षित किया जाए और संवेदनशील बनाया जाए.
  6. बिना ग्रामीणों के साथ चर्चा किए व ग्राम सभा की सहमति के कैंप ज़बरदस्ती स्थापित न की जाए.

रिपोर्ट: संतोष वर्मा, चाईबासा

Tags:KOLHAN NEWSDHANBAD NEWSJHARKHAND NEWSCHAIBASA DIG

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.