धनबाद(DHANBAD) | धनबाद की 'उर्वशी' पर शनिवार को आंधी और बारिश का कहर बरपा. 'उर्वशी' पर पेड उखड कर गिर गया. इसके बाद तो रेल अधिकारी सक्रिय हो गए और आनन-फानन में वृक्ष को हटाया गया. यह 'उर्वशी' वाष्प इंजन का एक मॉडल है, जिसे धनबाद रेल मंडल के मुख्य गेट पर हेरिटेज के रूप में लगाया गया है. 'उर्वशी' रेल परिचालन में धीरे धीरे हुए बदलाव की कहानी कहती है. यह वाष्प जनित इंजन है, जिसे 1914 में लंदन की कंपनी ने बनाया था. 1915 से इसकी सेवा शुरू हुई और 1954 में इसे भारत लाया गया.
फिर 1963 में पूर्व रेलवे ने इसे अधिग्रहित कर लिया और उसके बाद 32 वर्षों तक इसी व्यवस्था से काम चलता रहा. फिर 1995 में यह व्यवस्था समाप्त हो गई. मंडल रेल प्रबंधक ,धनबाद के कार्यालय के मुख्य गेट पर खड़ी इंजन 'उर्वशी' दरअसल रेलवे के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में हो रहे बदलाव की कहानी बताने को काफी है. यह बता रही है कि किस प्रकार कोयले और पानी से इंजन चलती थी.
यह बीते दिनों की बात है जब छोटी लाइन पर वाष्प इंजन से ट्रेन चला करती थी. धनबाद के बुजुर्गों का कहना है कि धनबाद स्टेशन के पूरब दिशा में लोको शेड था ,जहां कभी चहल-पहल हुआ करता था. लेकिन आज वह स्थान सुनसान पड़ा हुआ है. वाष्प इंजन की सीटी बजती रहती थी. लोको में काम करने वाले ग्रीस, मोबिल, कोयला अपने कपड़ों पर लगाएं व्यस्त रहते थे. वाष्प इंजन की जगह अब डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन में ले लिया है. रेल इंजन 'उर्वशी' धनबाद मंडल रेल कार्यालय के मुख्य गेट पर खड़ी होकर मानव कह रही है कि कभी मेरा भी समय था लेकिन आज बदलाव ने उसे निकम्मा बना दिया है.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश
