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रांची के पारस HEC अस्पताल में शुरू हुआ पार्किंसंस बीमारी का इलाज, जानिए क्या है पार्किंसंस

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 10:10:22 AM

रांची(RANCHI): मोमेंट डिसॉर्डर क्लीनक की शुरुआत पारस HEC में की गई है.इस क्लीनिक में  पार्किंसंस बीमारी का इलाज किया जाएगा.अब तक इस बीमारी का इलाज झारखंड में नहीं था लेकिन अब इलाज संभव हो पाया है.कम खर्च में कोई भी मरीज इलाज करा सकेंगे. इस संबंध में पारस HEC के मेडिकल डायरेक्टर डॉ संजय ने बताया कि बहुत अधिक केस इस बीमारी से जुड़े है.हर मंगलवार को क्लीनिक में इलाज किया जाएगा. पारस हेल्थकेयर राँची के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ संजीव शर्मा कहते हैं कि मूवमेंट डिसऑर्डर्स खासकर दो तरह के होते हैं. 

 

'हाइपोकाईनेसिया. इसमें मरीज़ अपनी इच्छा के अनुसार अपने हाथ या पैर को गति नहीं दे पाता है.इस बीमारी के मरीजों में सबसे ज्यादा पार्किंसंस के मरीज़ मिलते हैं.पार्किंसंस एक धीमी गति से बढ़ने वाला रोग है जिसमें कंपकंपी, धीमी गति और चलने में कठिनाई होती है.

 

हाईपरकाईनेसिया- इसमें मरीज़ का शरीर अत्यधिक गतिशील हो जाता है, मरीज़ का हाथ, पैर या शरीर का अन्य भाग अपने आप तेजी से काँपने लगता है.इसके परिणामस्वरूप कंपकंपी या ऐंठन जैसी अनैच्छिक गतिविधियों में वृद्धि होती है, वहीं इसके कुछ मरीज़ों में कठोरता और शारीरिक असंतुलन भी देखने को मिलता है.

 

मूवमेंट डिसऑर्डर क्लिनिक के प्रमुख डॉ संजीव ने बताया कि प्रत्येक व्यक्तिगत मूवमेंट डिसऑर्डर्स के लिए एक विशिष्ट रूप से तैयार उपचार और प्रबंधन की आवश्यकता होती है। मूवमेंट डिसऑर्डर से संबंधी कई अन्य बीमारियां भी हैं, जैसे- डिस्टोनिया, कोरिया, गतिभंग, कंपकंपी, मायोक्लोनस, टिक्स, टॉरेट सिंड्रोम, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम, स्टिफ पर्सन सिंड्रोम, चलते हुए लड़खड़ाना और विल्सन रोग.

 

पारस हेल्थकेयर राँची के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश ने बताया की मूवमेंट डिसऑर्डर क्लिनिक में इस तरह के मरीज़ों को सर्वोत्तम एवं उच्च दर्जे के इलाज की सुविधा दी जाएगी। इस क्लिनिक में पार्किंसन और डिस्टोनिया के ही मरीजों का इलाज होगा.जहाँ इन मूवमेंट डिसऑर्डर बीमारियों का इलाज कई माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकता है और मरीज़ को एक सामान्य जीवन जीने का तोहफ़ा दिया जा सकता है.पारस हेल्थकेयर की टीम ने इस बीमारी के शिकार कई रोगियों को उचित दवा, बोटोक्स इंजेक्शन और फिजियोथेरेपी के माध्यम से एक सामान्य जिंदगी देने में सफलता पाई है.

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