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शरद पूर्णिमा कल, जानिए माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए छतों पर क्यों रखा जाता है खीर

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:37:57 AM

झुमरी तिलैया (JHUMRI TILAIYA): आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इसी कारण इसे रास पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी व्रत जैसे नामों से भी जानते हैं. शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर रविवार को मनाया जायेगा. इस अवसर पर मंदिरों, निवास स्थलों पर संगीतमय भजनों का आयोजन के साथ-साथ भगवान को खीर और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जायेगा. इस रात्रि में कई लोग अपने निवास पर खुले स्थलों पर खीर को रखते हैं और इसे अमृत समझकर सुबह पीते हैं. रविवार की संध्या कोडरमा प्रखण्ड मैदान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तरफ से भारतीय खेल प्रतियोगिता मसलन कब्बडी, खो-खो, दौड़ आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे. जिला कार्यवाह दिलीप सिंह ने बताया कि खेल-खेल में राष्ट्रीय भाव और समारसता का भाव भी जागरण करना है. यहां पर बौद्धिक कार्यक्रम का भीआयोजन होगा. इसके बाद शिव तारा सरस्वती विद्या मंदिर में खीर का प्रसाद और अन्य प्रसाद ग्रहण करवाया जायेगा. 

रात भर होती है अमृत वर्षा

शरद पूर्णिमा को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है. जैसे रास पूर्णिमा, कुमार पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा आदि. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चन्द्रमा रात भर अमृत की वर्षा करता है. अतः इस रात्रि को गाय के दूध में खीर पका कर चन्द्रमा की किरणों के नीचे रखने से उसमें अमरत्व के गुण आ जाते हैं.

शरद पूर्णिमा क्यों है महत्वपूर्ण

पौराणिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी का समुद्र से आविर्भाव शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था. इसी कारण इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति हर बीमारी से छुटकारा पा सकता है. इसके साथ ही योगिराज श्री कृष्ण ने राधारानी के साथ पहला रास शरद पूर्णिमा को ही रचाया था. कुमार कार्तिकेय का जन्म भी इसी दिन हुआ था.

कैसे करें पूजन ताकि प्रसन्न हों मां लक्ष्मी

पण्डित गौतम पांडेय ने बताया कि शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण करने और माता लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है. कलश स्थापन करके श्री विष्णु और माता लक्ष्मी का शोडषोपचार या पंचोपचार पूजन करें. दूर्वा, कमल पुष्प, सिन्दूर और नारियल के लड्डू चढ़ाएं. शरद पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद तुलसी पूजा करें और शाम को दीपक जलाएं. ऐसा करने से सुख-समृद्धि की वृद्धि होगी.

रिपोर्ट: अमित कुमार, झुमरी तिलैया

Tags:News

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