टीएपी डेस्क (TNP DESK): कैसी होती होगी उन लोगों की मानसिक स्थिति जो आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होते हैं. कहते हैं चिंता चिता समान होती है. तो ज़रा सोचिए, क्या आत्महत्या करने वालों की चिंता ज़िन्दगी से भी बड़ी होती हैं? या फिर उसका दबाव इतना होता है कि लोग उसके सामने अपनी ज़िन्दगी हार जाना बेहतर समझते हैं. आपको जान कर हैरानी होगी की दुनियाभर में होने वाली मौत के टॉप 20 वजहों में से एक वजह आत्महत्या भी है. इन दिनों समाज और प्रशासन के लिए आत्महत्या की रोकथाम एक बड़ी चुनौती बन गई है. लोग इतने आवेगशील होते जा रहे हैं कि ज़रा से समस्या लोगों को पहाड़ लगने लगती हैं और इसका अंत बेहद दुखद होता हैं.
मनोचिकित्सक की सलाह है ज़रूरी
लोग अक्सर इस असमंजस में रहते हैं कि क्या आत्महत्या की प्रवृत्ति एक मनोरोग हैं. तो बता दें कि हां, किसी इंसान में आत्महत्या की प्रवृत्ति आना ही अपने आप भी भयावाह हैं. हालांकि लोगों के दिमाग पर अपनी हार या फिर किसी तरह की निराशा होने से आत्महत्या का विचार आता हैं, जो एक बार तक के लिए ठीक भी हैं. लेकिन हर छोटी बात पर ऐसा सोचना और बार-बार आत्महत्या को एक इजी ऑप्शन मानना मनोरोग होने के संकेत देता है. ऐसे समय पर जल्द ही किसी मनोचिकित्सक के सलाह लेना ज़रूरी हो जाता हैं. ऐसा करने से आत्महत्या को रोका जा सकता हैं. आत्महत्या रोकना अक्सर संभव है और एक व्यक्ति खुद इसकी रोकथाम में सबसे अहम कड़ी होता है.
झारखण्ड में अगर आत्महत्या के आकड़े
झारखण्ड में अगर आत्महत्या के आकड़ों की बात करें तो वह डराने वाले हैं. पुलिस फाइल के आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या करनेवाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से दोगुनी है. साल 2018 में झारखंड में 1317 लोगों ने आत्महत्या की थी. वहीं साल 2020 में जनवरी से जुलाई तक में ही 1010 लोग ने आत्महत्या की थी.
जिला 2018 2019 2020 से अब तक
धनबाद 457 444 219
जमशेदपुर 154 159 93
रांची 80 178 115
हजारीबाग 84 53 47
गुमला 85 71 46
सरायकेला 66 65 37
चाईबासा 52 74 39
देवघर 49 39 29
दुमका 51 60 36
जामताड़ा 32 21 17
चतरा 23 33 30
साहिबगंज 19 00 05
बोकारो 19 119 52
कोडरमा 06 28 14
रामगढ़ 31 37 21
लोहरदगा 16 11 08
खूंटी 19 26 15
पलामू 36 00 54
लातेहार 15 11 35
गोड्डा 04 13 08
पाकुड़ 16 05 07
गिरिडीह 00 38 16
सिमडेगा 00 23 19
गढ़वा 00 83 47
लंबी बीमारी से तंग युवती ने की आत्महत्या
वर्त्तमान की बात करें तो झारखण्ड में अभी भी आत्महत्या पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा हैं. बीते दिन ही एक युवती ने बस इसलिए आत्महत्या कर ली क्यूंकि वो अपनी लंबी बीमारी से परेशान हो चुकी थी. देवघर जिले के कुंडा थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती केवल 18 साल की थी. जो पिछले कई महीनों से बीमार थी. जानकारी के अनुसार लंबी बीमारी के कारण युवती के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया था. इसी बीच एक दिन मौका देख उसने फांसी के फंदे से झूल कर आत्महत्या कर ली. इस समय वह घर पर अकेली थी. जब घरवाले वापस आए, तो कमरे का दरवाज़ा खोलते ही उनके होश उड़ गए.
खुशहाल दिखने वाली छात्रा ने की आत्महत्या
दूसरा मामला लोहरदगा जिला के सेन्हा थाना क्षेत्र हैं. यहां प्लस टू की एक छात्रा ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस संबंध में मृतका के पिता ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने परिचित सहेलियों के साथ यह लोहरदगा आई और अपने विधालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई, जब यह अपने कार्यक्रम से लौटी तो उस वक्त घर में कोई नहीं था, ऐसे में खुद को घर में अकेला पाकर इसने अपने की दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. जिसका कारण अभी तक किसी को नहीं पता चल पाया है.
