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TNP SPECIAL:धनबाद में एक साथ ,एक मंच पर जुटे छह सांसदों के आउटकम का पढ़िए सिंहावलोकन

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 6:42:12 AM

 धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में शुक्रवार को कुल 6 सांसद एक साथ एक मंच पर जुटे.  मौका था धनबाद रेल मंडल संसदीय समिति की बैठक का.  लेकिन अगर इसका आउटकम जाना जाए तो शून्य   बटा सन्नाटा ही निकला.  6 सांसद आकर सिर्फ मांग किए,दवाब नहीं बना पाए ,वह भी चुनावी वर्ष में.  कोई ट्रेन चलाने की मांग की तो कोई स्टेशनों पर ट्रेन ठहराव की मांग की.  लेकिन कोई भी ठोस नतीजा नहीं निकला.  रेल मंडल संसदीय समिति की बैठक में हर बार नेता पहुंचते हैं, मांग रखते हैं लेकिन रेल मैनेजमेंट उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं  देता है.  करता वही है जो पूर्व निर्धारित  होता है.  धनबाद जैसे जिले में 6 सांसद पहुंचे हो और बैठक की सिर्फ औपचारिकता निभाई गई हो, तो इस बैठक के औचित्य पर सवाल उठना बहुत ही स्वाभाविक है. सिर्फ परंपरा का निर्वाह करने के क्या फायदे हो सकते है.  धनबाद रेल मंडल अभी राजस्व देने के मामले में पूरे देश में नंबर वन है.  ऐसे हालत में रेल सुविधाओं को बहाल करने के लिए रेल पर दबाव बनाने की जरूरत थी.  धनबाद के सांसद पीएन सिंह लोकल मुद्दों पर ही उलझे रहे.  यह  बात अलग है कि उन्होंने दिल्ली और बेंगलुरु के लिए सीधी ट्रेन  की भी मांग रखी.  

सबने कुछ न कुछ मांगे रखी जरूर लेकिन विश्वास में कमजोर थी 
 
पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम  ने डाल्टेनगंज स्टेशन का नाम मेदनीनगर  करने की मांग उठाई, इसके अलावा भी उन्होंने कई मांग रखी.  रांची के सांसद संजय सेठ ने कोरोना  काल में बंद हुई ट्रेनों को फिर से चालू कराने की मांग की.  इसके अलावा भी उन्होंने कई मांग रखी.  राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश भी इस बैठक में मौजूद थे.  उन्होंने रेलवे में ठेका पर होने वाले काम में स्थानीय लोगों को रोजगार की मांग रखी, सूत्र बताते हैं कि इस महत्वपूर्ण बैठक में सांसद या उनके जनप्रतिनिधि होमवर्क करके नहीं आते है.  पिछली बैठक में जो डिमांड किया गया होता है, उसका प्रिंट आउट लेकर चले आते है.  इस वजह से रेल अधिकारी भी  गलत- सही जवाब देकर बच निकलते है.  धनबाद की धरती पर अगर शुक्रवार को 6 सांसद मिल बैठकर सम्मेलन कक्ष में जाने से पहले कोई निर्णय कर लिया होता, तो क्या उस पर मुहर नहीं लग सकती थी. कम से कम  रेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने का मसौदा तो तैयार हो ही सकता था.लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.  कुल मिला जुला कर बैठक सिर्फ कोरम रही.इधर , सूत्र बताते हैं कि कल ही हैदराबाद में रेलवे के टाइम टेबल समिति की बैठक हुई है.  इस बैठक में झारखंड से  किसी भी नई ट्रेन का प्रस्ताव नहीं है.  फिर मंडल संसदीय समिति की बैठक में मांग उठाने का क्या फ़ायदा.  

इलाकों में समस्यायों की लम्बी फेहरिश्त है 

अगर झारखंड के 6 सांसद मिल बैठकर 10 बिंदुओं की भी आम राय  रेल मैनेजमेंट के सामने रख देते तो  तो क्या संभव नहीं था  कि वह मांग हर हाल में पूरी होकर रहती. केवल समय लग सकता था.  धनबाद कोयलांचल फिलहाल कई समस्याओं से जूझ रहा है.  गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी का इलाका धनबाद जिले में भी पड़ता है.  पशुपतिनाथ सिंह तो यहां के सांसद ही है.  चतरा के सांसद सुनील सिंह भी थे.  चतरा की भी दूरी धनबाद से अधिक नहीं है.  दीपक प्रकाश तो अभी हाल तक झारखंड प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके है.  ऐसे में अगर धनबाद रेल प्रबंधन को किसी सही मांग पर  बिना कोई  निर्णय की सहमति कराये यह सांसद धनबाद से चले गए का मतलब  रिजल्ट तो शून्य ही कहा जा सकता है.  गिरिडीह को छोड़कर बाकी सांसद  एक विचारधारा के थे. ऐसे में अगर  कोई निर्णय नहीं हुआ या कोई ऐसा भी प्रस्ताव तैयार नहीं हुआ, जो रेलवे बोर्ड को  भेजकर उसकी स्वीकृति ली जाए, फिर तो मंडल संसदीय बैठक के औचित्य पर  प्रश्नचिन्ह विपक्षी खड़ा करेंगे ही.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DHANBADBAITHAKRAILMANDALmp

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