धनबाद(DHANBAD): बंगाल के "कोयला किंग' कहे जाने वाले राजू झा की हत्या के बाद झारखंड और धनबाद कनेक्शन की बातें सामने आ रही है. धनबाद में तो 'ककॉन्ट्रैक्ट किलिंग' कोई नई बात नहीं है. लेकिन राजू झा की हत्या में भी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और धनबाद कनेक्शन का सुराग मिलने की वजह से पुलिस के भी कान खड़े हो गए है. वैसे, कोयलांचल के कोयला किंग सुरेश सिंह की भी हत्या 7 दिसंबर 2011 को उस वक्त कर दी गई थी कि जब वह एक शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए धनबाद क्लब पहुंचे थे. हत्या का तात्कालिक कारण कुछ और बताया गया था और गोली मारने का आरोप सिंह मेंशन के रामधीर सिंह के बेटे शशि सिंह पर लगा था. उस घटना के बाद से शशि सिंह धनबाद से फरार चल रहे है. इस बीच पता चला है कि जिस नीले रंग की कार पर सवार होकर हत्यारे राजू झा को मारने पहुंचे थे. वह कार पुलिस को लावारिस हालत में रेलवे स्टेशन के बगल की सड़क पर मिली है. हो सकता है कि हत्यारे सड़क मार्ग से भागने के बजाय रेल मार्ग का चयन किया हो. घटना के बाद तो पुलिस भी सक्रिय हो गई थी. चेक नाका पर चेकिंग लगाई गई थी. इस वजह से अपराधियों ने ट्रेन का मार्ग चुनना ज्यादा सेफ समझा होगा.
पुलिस को भरमाने का भी किया गया है प्रयास
यह भी हो सकता है कि पुलिस को भरमाने के लिए कार को छोड़कर किसी अन्य वाहन से फरार हुए हो. वैसे पुलिस इस पूरे मामले में कहीं न कहीं धनबाद कनेक्शन पर फोकस किए हुए है. फोकस करने की वजह यह है कि टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को पता चला है कि नीले रंग की कार घटना के दिन सुबह-सुबह धनबाद की ओर आई है. फिर धनबाद से लौटी है. हो सकता है कि शूटरों को लेने के लिए कार धनबाद आई हो. शूटर पहले से धनबाद में कहीं पर ठिकाना बनाये हुए हो. हालांकि पुलिस को गाड़ी का नंबर फर्जी मिला है. मतलब पूरी प्लानिंग के साथ हत्या को अंजाम दिया गया है. एक बात और पुलिस को उलझा रही है कि जिस गाड़ी में राजू झा सवार थे, उसमें ड्राइवर सहित तीन लोग थे अथवा चार. लोग बताते है कि राजू झा की तो हत्या ही हो गई, दूसरे एक व्यक्ति को गोली लगी थी लेकिन वह अस्पताल से रिलीज हो गया है. चालक को कोई चोट नहीं आई है. इलाके में चर्चा है कि गाड़ी में चौथा व्यक्ति भी सवार था और वह गाड़ी उसी की थी. लेकिन घटना के तुरंत बाद से वह फरार हो गया. उसे भागने का साक्ष्य पुलिस ढूंढ रही है.
तो क्या पुलिस रिकॉर्ड में भगोड़ा भी था राजू झा के साथ
चौथे जिस व्यक्ति पर संदेह किया जा रहा है वह पुलिस रिकॉर्ड में भगोड़ा है. यहां सवाल उठता है कि क्या सब कुछ प्लानिंग करने के बाद हत्या को प्लांट किया गया. क्या दूसरे जिस व्यक्ति को गोली लगी है, यह एक सोची-समझी योजना थी. क्या राजू झा को जान से मारा गया और दूसरे को घायल किया गया ताकि किसी को कोई संदेह नहीं हो. अगर गाड़ी में चौथा व्यक्ति था तो घटना के तुरंत बाद वह लापता कैसे हो गया. पुलिस इसकी भी जांच कर रही है. वैसे घायल जिस व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी मिली है, पुलिस उसे कई दौर में पूछताछ कर चुकी है और अभी आगे पूछताछ करने की तैयारी कर रही है. पहली अप्रैल को राजू झा गाड़ी में बैठे हालत में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने कम से कम आधा दर्जन फायरिंग की बात कही है. यह घटना शक्ति नगर में की गई थी. आधा दर्जन फायरिंग में जान लेने वाली गोलियां राजू झा को ही लगी और वह वहीं लुढ़क गए. बाकी लोग बच गए, यह हत्यारों की पूरी कार्रवाई भी कई संदेशों को जन्म देता है.
कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के लिए कुख्यात रहा है धनबाद
वैसे कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के लिए धनबाद कुख्यात रहा है. यहां बाहर से अपराधियों को बुलाकर हत्या कराई जाती रही है. चाहे वह मामला नीरज सिंह हत्याकांड का हो अथवा सकलदेव सिंह का. नीरज सिंह को तो मारने के लिए अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. लेकिन सकलदेव सिंह की हत्या तो शार्प शूटर ने फिल्मी स्टाइल में की थी. चलती गाड़ी में उन्हें गोली मारी गई थी. लोग बताते हैं कि शूटर ने सिर्फ एक ही गोली चलाई और वह सकलदेव बाबू को लगी. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. मतलब गोली मारने वाला कितना अधिक शातिर और निशानेबाज रहा होगा. राजू झा हत्याकांड में बंगाल पुलिस झारखंड और धनबाद पुलिस के सहयोग से हत्यारों को कैसे और कहां से ढूंढ निकालती है,यह देखने वाली बात होगी. राजू झा के भाजपा में होने के कारण यह मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
