धनबाद(DHANBAD): देश और दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में पेंशन का मुद्दा अब बड़ा आकार लेने लगा है. कोल् इंडिया के रिटायर्ड कर्मचारी तो आंदोलन की राह पर थे ही ,अब रिटायर्ड अधिकारी भी आंदोलन में कूद गए है. कोल इंडिया के पांच अध्यक्ष, 28 सीएमडी सहित कुल 75 अधिकारियों ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. यह पत्र 23 मार्च को लिखा गया है. यह सभी कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों से रिटायर्ड है.
और क्या -क्या बताया गया है पत्र में
पत्र में कहा गया है कि अपने कार्यकाल में उन लोगों ने देश की 55% व्यावसायिक ऊर्जा को पूरा करने में सहयोग किया। वार्षिक लगभग 70,000 करोड़ की राशि से देश की मदद भी की है. यह भी कहा गया है कि कोल इंडिया के लगभग 5 लाख लोग अपील कर रहे हैं कि पेंशन में रिवीजन किया जाये। समस्या यह है कि रिटायरमेंट के दिन पेंशन की राशि निर्धारित होती है और वह यथावत बनी रहती है. मूल्य वृद्धि का उस पर कोई असर नहीं होता है. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल् एग्जीक्यूटिव्स तथा ऑल इंडिया कॉल पेंशनर्स एसोसिएशन की मांग का समर्थन करते है.
प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की की गई मांग
पत्र में यह भी मांग की गई है कि प्रधानमंत्री इसमें सीधे हस्तक्षेप करें और उनके द्वारा की गई राष्ट्र सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाए. पत्र में कोल इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एस के चौधरी, पीके सेनगुप्ता पी एस भट्टाचार्य, एनसी झा, अनिल कुमार झा के हस्ताक्षर है. इसके अलावे 28 सीएमडी के भी हस्ताक्षर हैं, जो रिटायर्ड कर चुके है. रिटायर्ड सीएमडी में आर बी माथुर, सीआर दास, ए आर शर्मा, बीके सहगल, एसएन शर्मा, बी एन पान, महेश कुमार थापर सहित 28 सीएमडी के हस्ताक्षर है. वैसे कुल 75 रिटायर्ड कोयला अधिकारियों ने इस पत्र में हस्ताक्षर किए है.
पेंशन बढ़ाने की मांग लम्बे समय से होती आ रही है
बता दे कि कोल इंडिया के रिटायर्ड कर्मी और अधिकारी पेंशन को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे है. कई बार प्रदर्शन हुए, आज भी बहुत सारे अधिकारी और कर्मचारियों को ₹1000 रुपए की पेंशन मिल रही है. यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य निधि को बुढ़ापे की लाठी माना जाता है. इसी पैसे के सहारे सेवानिवृत कर्मी अपना जीवन यापन करते है. क्या आप भरोसा कर सकते हैं कि आज के जमाने में भी कम पेंशन मिलती होगी. यह सुनने में अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन है बिल्कुल सच है. वह भी वैसे लोगों को इतनी कम पेंशन मिलती है, जो प्रकृति के खिलाफ काम कर कोयल का उत्पादन करते थे. हालांकि पेंशनर्स एसोसिएशन न्यूनतम पेंशन कम से कम 5 हजार करने की मांग करता रहा है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो