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Tnp Exclusive: वाह रे साइबर अपराधी: ढाई करोड़ के बाद पढ़िए-कैसे हुआ एक करोड़ के लेन-देन का खुलासा, लाखों अभी भी खाते में !

Tnp Exclusive: वाह रे साइबर अपराधी: ढाई करोड़ के बाद पढ़िए-कैसे हुआ एक करोड़ के लेन-देन का खुलासा, लाखों अभी भी खाते में !

धनबाद (DHANBAD) : धनबाद को साइबर अपराधियों ने चारागाह लिया है. रोज नए-नए ढंग से ठगी कर रहे है. घर में झाड़ू-पोछा करने वाली महिला के खाते में ढाई करोड रुपए मंगाकर उसे निकालने के बाद एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. धनबाद के साइबर थाना में पांच मई को एक महिला ने शिकायत की है कि उनके बगैर किसी जानकारी के उनके नाम से एक्सिस बैंक में खाता खोला गया है. इस खाते से एक करोड रुपए का लेन देन किया गया है.  फिलहाल उस खाते में 12 लाख की राशि मौजूद है. महिला के परिवार वालों को जब इसकी जानकारी हुई, तो तत्काल उन्होंने खाते को फ्रीज करा दिया. इस वजह से 12 लाख रुपए साइबर अपराधी नहीं निकाल सके है. 

महिला का आरोप-गलत ढंग से हुआ आधार और पैन कार्ड का उपयोग 

महिला ने साइबर थाना को दिए आवेदन में कहा है कि मेरे आधार और पैन कार्ड का गलत उपयोग कर एक्सिस बैंक ,हीरापुर शाखा, धनबाद में एक बैंक खाता खोला गया.  इसकी  मुझे या मेरे परिवार के किसी भी व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं है.  हाल ही में दो एक्सिस बैंक के कर्मचारी महिला के घर गए, उनका मकसद नया खाता खुलवाना था.  जब उन लोगों ने पैन  और आधार की जांच की तो पता चला कि उस महिला के नाम से पहले से खाता मौजूद है.  यह जान महिला और महिला के परिवार वाले परेशान हो गए.  क्योंकि कभी एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया ही नहीं था. 

अभी भी खाते  में पड़े हुए है बारह लाख रुपये 
 
बैंक खाते से एक करोड़ से अधिक का लेन देन हो चुका था और उसमें 12 लाख से अधिक राशि मौजूद थी. बैंक ने खाते को तो फ्रीज कर दिया है लेकिन महिला का आरोप है कि बैंक के ही दो कर्मचारी उसके घर पहुंचे और खाता अनफ्रीज करने का दबाव बनाने लगे. महिला ने थाना प्रभारी से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए. यह शिकायत 5 मई  को साइबर थाने में की गई है. बता दे कि  धनबाद के पुलिस लाइन में रहने वाली एक झाड़ू-पोछा करने वाली महिला अपर्णा देवी  को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर पहले खाता खुलवाया गया था. सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर एक महिला ने यह खाता  खुलवाया था. खाता खुलवाने वाली महिला का नाम रीता देवी बताया गया था. उसके बाद खाता खुलवाने वाली महिला ने एटीएम और पासबुक को अपने कब्जे में लिया था. फिर ढाई करोड रुपए उस खाते में मंगाए और किस्तों में राशि निकाल ली. उसके बाद महिला फरार हो गई है. 

बैंक कर्मी जब खोजते हुए महिला के घर पहुंचे तो हुआ खुलासा 
 
इतनी बड़ी लेनदेन की जानकारी होने पर बैंककर्मी  नौकरानी को खोजते हुए उसके घर पहुंचे. बैंककर्मियों ने उसे ढाई करोड रुपए के लेनदेन की जानकारी दी. पुलिस लाइन, बाउरीपाड़ा की रहने वाली अपर्णा देवी ने मामले की शिकायत धनबाद साइबर थाना में की है. उसने आवेदन में  बताया है कि बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, सरायढेला शाखा में उसके बैंक खाते से ढाई करोड रुपए का अनाधिकृत लेन देन हुआ है. उसने यह भी कहा है कि वह पढ़ी-लिखी नहीं है. लोगों के घरों में चूल्हा-चौका कर अपने परिवार का पेट पालती  है. उसने बताया है कि केंद्रीय अस्पताल,धनबाद  के पास रहनेवाली रीता राय से उसकी मुलाकात हुई. उसने अपर्णा को₹5000 प्रतिमाह  सरकारी सहायता दिलाने की बात कही. बताया कि इसके लिए बैंक खाता खुलवाना पड़ेगा. बात इतनी ही नहीं थी, बैंक खाता खुलवाने के लिए जब अपर्णा के पास पैसे नहीं थे, तो रीता ने ही उसे ₹2000 दिए थे.  18 अक्टूबर 2024 को खाता खुला था.  खाता खुलने के बाद बैंक की ओर से पासबुक और एटीएम कार्ड दिए गए थे. 

एटीएम  कार्ड और पासबुक भी चतुर महिला ने अपने पास रख लिया था 

एटीएम  कार्ड और पासबुक वाला लिफाफा लेकर वह अपने घर आ गई थी. अपर्णा ने पुलिस को बताया कि खाता खोलने के बाद रीता राय उसके घर आई, उस समय वह घर पर नहीं थी.  बेटी  को बताया कि सरकारी राशि के लिए एटीएम और पास बुक  की जरूरत है. एटीएम और पासबुक लेने के बाद वह गायब हो गई. कई बार अपर्णा गीता के संबंध में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उसका कोई  पता नहीं चला. बताया जाता है कि अपर्णा ने पुलिस को 54 पेज का एक बैंक स्टेटमेंट भी दिया है. प्रारंभिक जांच में पता चला है की रीत उर्फ गीता ने बैंक के ऑपरेशन को अपने कंट्रोल में रखा था. इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के इस्तेमाल से रुपए मंगाए और निकाले  गए है. छोटी-छोटी रकम यूपीआई के माध्यम से अपर्णा के बैंक खाते में आए हैं, जबकि छोटी-छोटी रकम बैंक खाते में आई लेकिन मोटी-मोटी राशि बैंक खाते से निकाल ली गई है.

रिपोर्ट-प्रकाश  

Published at:08 May 2025 06:43 AM (IST)
Tags:DhanbadCyber CrimeCyber PoliceFIRBank
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