✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

सरकारी अनुदान से चलता है यह स्कूल, मगर यहां के कायदे पूरी तरह से हैं मिशनरी

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:43:23 AM

गोड्डा (GODDA): झारखंड में इन दिनों स्कूलों में बिना किसी सरकारी आदेश के जुमे यानी शुक्रवार को छुट्टी और रविवार को विद्यालय खुले होने का मामला चल ही रहा है कि अब गोड्डा के एक स्कूल से नया मामला सामने आया है. यहां के एक विद्यालय में सरकारी अनुदान के साथ मध्यान्ह भोजन सरकार की ओर से मुहैया कराया जाता है. मगर विद्यालय को मिशनरी प्रबंधन उनके नियमों के अनुसार संचालित करते हैं .

अलग अलग मुद्रा में खड़े हो प्रार्थना करते हैं बच्चे

बात गोड्डा जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित संत मार्क्स मध्य विद्यालय की है. जो 1869 में मिशनरियों ने आजादी से पहले स्थापित किया था. मगर आजादी से पहले ही इस विद्यालय को सरकार के अधीन लेकर इसे अनुदान देने की शुरुआत हो गयी थी. यहां हिन्दू बच्चे तो हाथ जोड़ प्रार्थना करते हैं, लेकिन मुस्लिम और इसाई बच्चे हाथ जोड़ कर प्रार्थना नहीं करते. इतना ही नहीं प्रार्थना भी ईसाई धर्म आधारित ही करवाई जाती है. सवाल ये उठता है कि अगर ये विद्यालय मिशनरी है तो फिर नाम भी मिशनरी होना था. इसे मध्य विद्यालय क्यों किया गया और अनुदान दिया जाता हैस तो फिर धर्म आधारित कार्यशैली क्यों होती है.

यह भी पढ़ें:

कस्तूरबा विद्यालयों में खाद्यान्न-पोशाक सामग्री आपूर्ति में मची है लूट, 720 रुपये किलो मछली की हो रही सप्लाई

मुद्दे को अनदेखी कर रहे शिक्षक

एक तरफ सरकार की ओर से विद्यालय के शिक्षकों को सरकार भुगतान कर रही है. बच्चों को मध्यान्ह भोजन की राशि उपलब्ध कराई जा रही. तो वहीं स्कूल में इस तरह के नियमों का पालन किया जा रहा है, जो न शिक्षा और न ही शिक्षा लेने आ रहे बच्चों पर अच्छा असर छोड़ रहा है. लेकिन हैरानी की बात है कि किसी भी प्रशासनिक पदाधिकारी या विभागीय अधिकारी का ध्यान इस तरफ क्यों नहीं जा रहा है. या फिर कहे तो देख कर भी अनदेखी की जा रही है. आखिर विद्यालय में धर्म आधारित विभाजन बच्चों का कैसे किया जा रहा है.

स्कूल की प्रिंसिपल ने झाड़ा पल्ला

इन सब मामले में जब स्कूल की प्रिंसिपल सुशीला मुर्मू से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि यहां “हे प्रभु ......”प्रार्थना शुरू से होते आ रही और वो किसी को प्रार्थना के वक्त मुद्रा बनाएं जाने का दबाव नहीं दिया जा सकता. तो वहीं जिला शिक्षा अधीक्षक सह शिक्षा पदाधिकारी सह RDDE रजनी कुमारी ने कहा कि किसी भी विद्यालय में धर्म आधारित प्रार्थना के हिसाब से बच्चों को बांटा नहीं जा सकता, ऐसा अगर हो रहा तो इसकी जांच की जाएगी .

रिपोर्ट: अजीत कुमार सिंह, गोड्डा

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.