धनबाद(DHANBAD): 375 लोगों की जान लेने वाली, बॉलीवुड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली चास नाला खदान में अब भूमिगत माइनिंग नहीं होगी .1975 में देश के सबसे बड़े खदान हादसा में इसका नाम दर्ज हुआ था. 375 लोगों की जल समाधि हो गई थी. यह बात अलग है कि सुरक्षा के कारणों से ऐसा किया गया है .अब भूमिगत खनन के बजाय दूसरी तरफ से ओपन कास्ट माइनिंग की जाएगी. जानकारी के अनुसार ओपन कास्ट एवं डीप माइंस के बीच दीवार कम होने के कारण डीजीएमएस ने कोलियरी प्रबंधन को यह आदेश दिया कि सुरक्षा कारणों से दोनों तरफ से कोयला खनन नहीं किया जा सकता है. भूमिगत खदान चलाएं या फिर ओपन कास्ट से खनन करें .सुरक्षित खनन के लिए डीप माइंस और ओपन कास्ट के बीच कम से कम 60 मीटर की दीवार जरूरी है .कोयला खनन होते होते दीवार की चौड़ाई 60 मीटर से कम हो गई है. वैसे भी आर्थिक रूप से ओपन कास्ट के माध्यम से खनन का काम लाभदायक है, इसलिए भी डीप माइंस में अब खनन में गंभीरता नहीं रह गई है.
सूत्र बताते हैं कि पिछले ढाई साल से खनन नहीं हो रहा है. इधर जाकर निर्णय लिया गया है कि दूसरी तरफ से ओपन कास्ट के माध्यम से खनन किया जाए. चास नाला डीप माइंस में 27 दिसंबर 1975 को खदान में पानी भरने से 375 कोयला खनिकों की जल समाधि हो गई थी. अब तक यह देश की सबसे बड़ी खान दुर्घटना थी. पहले IISCO के अधीन थी. इसके बाद उसे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दे दिया गया. वैसे भी धनबाद में संचालित बीसीसीएल लगभग आउटसोर्सिंग के हवाले हैं. भूमिगत खनन पर प्रबंधन का ध्यान नहीं है. यह व्यवस्था खर्चीली होती है और रिस्क भी अधिक होता है. इस वजह से ओपन कास्ट माइनिंग की तरफ झुकाव बढ़ रहा है. आउटसोर्सिंग कंपनियों को पैच आवंटित किया जा रहा है. धीरे-धीरे अन्य कंपनियों की खदानों को भी ओपन कास्ट माइनिंग के लिए तैयार किया जा रहा है.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह
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