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आगे भी होगा दिलचस्प खेल :बागी अगर निगम चुनाव जीत गए तो क्या करेंगी पार्टियां, भाजपा क्यों है टेंशन में!

आगे भी होगा दिलचस्प खेल :बागी अगर निगम चुनाव जीत गए तो क्या करेंगी पार्टियां, भाजपा क्यों है टेंशन में!

धनबाद(DHANBAD): धनबाद के मतगणना स्थल पर यह चर्चा तेज है कि अगर "बागी" मेयर का  चुनाव जीत गए, तो फिर प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा की नोटिस का क्या होगा? नगर निकाय चुनाव में हुई वोटिंग की गिनती शुक्रवार को शुरू हो गई है.  गिनती जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, अपडेट मिलने शुरू हो जाएंगें।  झारखंड के लगभग अधिकतर जगह पर बागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं.  ऐसे में जिन जगहों पर बागी उम्मीदवार चुनाव जीत जाएंगे, उनके बारे में पार्टियां  क्या करेंगी।  झारखंड में कई ऐसे निकाय क्षेत्र हैं, जहां बागी मजबूत स्थिति में है.  लेकिन उन्हें बागी घोषित किया गया है और दूसरे उम्मीदवार को समर्थन दिया गया है.  यह  अलग बात है कि भाजपा में बागियों  की संख्या अधिक है.  भाजपा ने 18 लोगों को नोटिस  दिया था.  लेकिन नोटिस पर आगे समय सीमा खत्म होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.  

परिस्थितियों के अनुसार पार्टिया बदल सकती हैं निर्णय 

मतलब साफ है कि भाजपा परिस्थितियों के अनुसार अपना निर्णय बदल सकती है.  नोटिस को गदालखाते में भेजा  जा सकता है.  यह बात भी सच है कि अगर भाजपा से बागी बनकर कोई उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है, तो भाजपा उसे स्वीकार करेगी अथवा अस्वीकार, यह एक बड़ा मंथन और चर्चा का विषय है.  बागी उम्मीदवारों में कई मजबूत भी दिख रहे हैं.  भाजपा के लिए एक झटके में पार्टी से बाहर कर देना थोड़ा कठिन दिख रहा है.  धनबाद में तो मेयर पद को लेकर भाजपा काफी उत्साहित दिखीं ,जोरआजमाईस  भी खूब हुई.  शेखर अग्रवाल जैसे भाजपाई पार्टी को छोड़कर झामुमो   के साथ चले गए.  वहीं झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह बागी बनकर चुनाव मैदान में उतर गए.  शांतनु चंद्र, मुकेश पांडे ,भृगुनाथ  भगत आदि भी बागी बनकर मैदान में डटे रहे.  सूत्रों की माने तो धनबाद के बागी उम्मीदवारों को लेकर भाजपा दुविधा में फंसी हुई है.  बागी उम्मीदवारों को कई बड़े नेताओं का वरदहस्त   है. 

इस  तर्क को भी मिल रही खूब चर्चा ----

 तर्क दिया जा रहा है कि बागी नेताओं को अगर पार्टी से अलग कर दिया जाए, तो निश्चित रूप से वह किसी न किसी पॉलीटिकल पार्टी में जाएंगे और वहां राजनीति करेंगे।  लेकिन इसी के साथ यह भी सवाल उठता है कि बागियों  पर अगर कार्रवाई नहीं की गई, तो अनुशासनहीनता भी बढ़ सकती है.  वैसे बागियों  का भी अपना पक्ष है.  उनका कहना है कि चुनाव दलीय आधार पर तो हो नहीं रहा है, ऐसे में उन पर कार्रवाई का कोई औचित्य दिख नहीं रहा है.  भाजपा ने 12 फरवरी को ही डेढ़ दर्जन लोगों को पूरे झारखंड में नोटिस दिया था.  एक सप्ताह में जवाब देने को कहा गया था. प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा ने यह  नोटिस जारी किया था.  अब देखना है कि यह नोटिस का आगे क्या मतलब निकलता  है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Published at: 27 Feb 2026 06:34 AM (IST)
Tags:DhanbadNikay ChunawNoticeBJPझारखंडJharkhand bjpNikay chunaw result

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