रांची (RANCHI): देश में जनगणना 2027 की शुरुआत हो गई. लंबे समय के बाद देश की आबादी की जानकारी सबके सामने आएगी.लेकिन झारखंड में इस जनगणना पर भी पेंच है. क्योंकि जनगणना में कई जानकारी देनी होती है. संबंधित धर्म और जाती की सभी सूचना अधिकारी को फॉर्म में भरना पड़ता है. लेकिन इस कॉलम में सरना धर्म कोड/आदिवासी की कोई जगह नहीं होगी. जिसपर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक पत्र लिखा है. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के गवर्नर संतोष गंगवार से जनगणना 2027 में सरना धर्म कोड और आदिवासी कॉलम को जगह देने की मांग की है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा कि झारखंड के लोगों के भवना का ख्याल रखते हुए देश में हो रही जनगणना में सरना धर्म को जोड़ा जाए. जिससे देश के आदिवासी जो प्राकृतिक के पुजारी है सरना धर्म को मानते है ऐसे में वह अपने भी कॉलम को भर सके. उन्होंने लिखा है कि झारखंड के भावना को समझते हुए जनगणना के कॉलम में सरना धर्म कोड को शामिल करने की पहल की जाए.
साथ ही सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने जनगणना के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया और बताया कि लंबे समय के बाद देश में जनगणना का कार्य शुरू किया गया है. इसमें पहले चरण में जनगणना शुरू हो गई. ऐसे में इसमें सरना धर्म कोड के कॉलम को भी शामिल किया जाना चाहिए. जिससे देश में रहने वाले वैसे लोग जो सरना धर्म को मानते है उन्हे एक सम्मान मिल सके. पिछले जनगणना में 50 लाख से अधिक ऐसे लोग थे जिन्होंने अपने धर्म को अन्य में भरा है. ऐसे में जब सरना धर्म कोड का कॉलम होगा तो आदिवासी की आबादी भी साफ बता चल पाएगी.
जिससे देश में बनने वाली जन कल्याणकारी योजनाओं में आदिवासी समाज को सही जगह मिल सके. उन्होंने सभी को पत्र में लिखा है कि झारखंड की भावना को समझ कर इस कॉलम को जोड़ने की कृपा करें. जिससे झारखंड में रहने वाले लोगों के भवना भी इसमें जुड़ सके.