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दुमका में काम नहीं अब नाम पर हो रही है राजनीति, पढ़ें कैसे मयूराक्षी नदी पर बने सेल्फी ब्रिज के नामकरण पर शुरु हुआ बवाल  

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 6:50:26 AM

दुमका(DUMKA):वैसे तो कहा जाता है कि नाम मे क्या रखा है, काम बोलता है,लेकिन नाम मे क्या रखा होता है. यह जानना हो तो हम आपको ले चलते है झारखंड की उपराजधानी दुमका.30 अक्टूबर को सीएम हेमंत सोरेन ने कुमडाबाद में मयूराक्षी नदी पर निर्मित राज्य के सबसे लंबे पुल का लोकार्पण किया, लेकिन अब इस पुल के नामकरण को लेकर उपराजधानी से लेकर राजधानी तक राजनीति तेज हो गयी.

दुमका में काम नहीं अब नाम पर हो रही है राजनीति

पूल के उद्घाटन के बाद मंच से कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने इस पुल का नामकरण दिसोम गुरु शीबू सोरेन के नाम पर रखने का सुझाव दिया, अपने संबोधन में सीएम हेमंत सोरेन ने इस सुझाव पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह आंदोलनकारियों के लिए सम्मान की बात होगी. वैसे कैबिनेट से मोहर लगने के बाद ही पुल का आधिकारिक रूप से नामकरण होगा.मंत्री बादल पत्रलेख के सुझाव पर हेमंत सोरेन की सहमति बीजेपी को नागवार गुजरी और रांची में प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा ने इस पुल का नाम तिलका मांझी के नाम पर रखने की मांग कर डाली.

मयूराक्षी नदी पर बने सेल्फी ब्रिज के नामकरण पर शुरु हुआ बवाल

दुमका में पूर्व मंत्री लुइस मरांडी ने कहा कि पूल का नाम शीबू सोरेन के नाम पर रख कर सरकार क्या जताना चाहती है. राज्य सरकार से पूछा कि इस पूल के निर्माण में शिबू सोरेन या वर्तमान सरकार का क्या योगदान है, जनता को बतानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस पूल की आधारशिला पूर्ववर्ती रघुवर सरकार में 2018 में रखी गयी थी.क्षेत्र की जनता की परेशानी और चिरलम्बित मांग को देखते हुए पूल निर्माण की स्वीकृति मिली थी, जो साकार हुआ.हेमंत सरकार झूठा श्रेय लेना चाहती है.

इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है

वहीं मांग प्रतिमांग के बीच जनता ने उद्घाटन के पूर्व ही इस पुल का नामकरण कर दिया है. आज हर किसी की जुबान पर इस पूल की चर्चा है, और लोग इसे सेल्फी ब्रिज के नाम से जानती है. सेल्फी ब्रिज नामकरण के पीछे उनका अपना तर्क है. दरअसल इस पुल की बनाबट ही कुछ ऐसी है.पुल के मध्य भाग में चौड़ाई बढ़ा कर सेल्फी पॉइंट बनाया गया है. सोच है कि इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. मसानजोर डैम के पास यह पूल है. विशाल जलस्रोत, ऊंची ऊंची पहाड़ियां और हरे भरे जंगल यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाती है.इस पुल से गुजरने वाले लोग सेल्फी पॉइंट पर खड़े होकर प्राकृतिक सुंदरता के साथ सेल्फी लेना नहीं भूलते सुबह शाम लोगों की भीड़ लगी रहती है.

पूल को 198.11 करोड़ की लागत से बनाया गया है

आपको बताये कि इसमें कोई शक नहीं कि पुल के चालू होने से मसलिया और रानीश्वर प्रखंड की दूरी जिला मुख्यालय से कम हो गयी है. साथ ही बिहार से दुमका के रास्ते पश्चिम बंगाल में प्रवेश के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन गया है. लोगों को इसका लाभ मिल रहा है.सरकार किसी की भी हो उसका दायित्व बनता है कि जनहित में कार्य करें, लेकिन यहां तो कार्य का श्रेय लेने की भी होड़ मची है.मयूराक्षी नदी पर बने राज्य के सबसे लंबे पुल कई मायनों में खास है.पुल की लंबाई 2.34 किलोमीटर है जिसकी लागत 198.11 करोड़ है. आधुनिकतम तकनीक से निर्मित 52 स्पेन की इस पुल की चौड़ाई 16 मीटर है. मध्य भाग में 8 स्पेन में इसकी चौड़ाई 30 मीटर रख कर सेल्फी पॉइंट का रूप दिया गया है.सरकार के स्तर से इस पुल का नाम जो भी रखा जाए, लेकिन जनता इसका नाम सेल्फी ब्रिज रख चुकी है और उनकी जुबान से सेल्फी ब्रिज को हटाने में काफी समय लग जायेगा.

रिपोर्ट-पंचम झा

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